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संकल्प व सहयोग का एक वर्ष : खाद्यमंत्री अमरजीत भगत ने पत्रकार वार्ता में दी उपलब्धियों की जानकारी

रायपुर/ खाद्यमंत्री अमरजीत भगत ने मंत्री के रूप में अपने एक वर्ष का कार्यकाल पूरा होने पर पत्रकारों से चर्चा करते हुए बताया कि 29 जून 2019 को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सरकार में अमरजीत भगत ने 13वें मंत्री के रूप में शपथ लिया। उन्हें खाद्य, नागरिक आपूर्ति व उपभोक्ता संरक्षण, संस्कृति, योजना व सांख्यिकी विभाग मंत्रालय का कार्यभार सौंपा गया। इस एक वर्ष में अमरजीत भगत ने अपने दायित्वों का निर्वाह करते हुए, छत्तीसगढ़ सरकार के अनेक निर्णयों को क्रियान्वित करने में सक्रिय योगदान दिया। उनका संकल्प है कि छत्तीसगढ़ में कोई भूखा न सोए, जिसे पूरा करने के लिये उन्होंने लगातार कार्य किया। लोगों को योजनाओं का लाभ मिल रहा है कि नहीं मिल रहा देखने के लिये खुद उनके बीच गए। कोविड-19 संक्रमण की रोकथाम के लिये लगाए गए लॉकडाउन के दौरान खाद्य व नागरिक आपूर्ति विभाग की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण रही। इस दौरान 57 लाख अन्त्योदय, प्राथमिकता, एकल निराश्रित तथा नि:शक्तजन राशनकार्डधारियों को 03 माह अप्रैल, मई एवं जून 2020 का चावल नि:शुल्क वितरण किया गया। इन राशनकार्डधारियों को माह अप्रैल में 02 माह अप्रैल एवं मई का खाद्यान्न शक्कर, नमक एकमुश्त वितरण किया गया है। इसके अतिरिक्त उपरोक्त राशनकार्डधारियों को अप्रैल से जून 2020 तक नि:शुल्क 5 किलो प्रति सदस्य अतिरिक्त खाद्यान्न प्रदाय किया गया। भगत ने बताया कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के क्रियान्वयन में छत्तीसगढ़ देश के अग्रणी राज्यों में से एक रहा। इस योजना के तहत अप्रैल व मई माह में शत-प्रतिशत तथा जून में 98 प्रतिशत खाद्यान्न का वितरण गरीब व जरूरतमंदों को किया गया। राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ के सभी राशनकार्डधारी परिवारों को 35 किलो हर महीने चावल देने का वचन पूरा किया है। राज्य के सभी निवासियों को खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए महात्मा गांधीजी की 150 वीं जयंती पर 02 अक्टूबर 2019 से सार्वभौम पीडीएस का शुभारंभ किया गया। सार्वभौम पीडीएस के अंतर्गत सामान्य परिवारों (आयकरदाता एवं गैर आयकरदाता) को भी खाद्यान्न प्रदाय किया जा रहा है। भगत ने कहा कि राज्य में कोरोना वायरस संक्रमण से बचाव के लॉकडाउन के दौरान पीडीएस के अंतर्गत प्रचलित 66.22 लाख राशनकार्डों में पंजीकृत 2.46 करोड़ सदस्यों खाद्यान्न सुरक्षा उपलब्ध कराई गई। प्राथमिकता वाले राशनकार्डों पर खाद्यान्न की पात्रता में वृद्धि की गई है। एक सदस्य वाले परिवार को 10 किलो, 2 सदस्य वाले परिवार को 20 किलो, 3 से 5 सदस्य वाले परिवार हेतु 35 किलो तथा 5 से अधिक सदस्य वाले परिवार के लिए प्रत्येक अतिरिक्त सदस्य हेतु 7 किलो अतिरिक्त चावल का वितरण किया जा रहा है। बस्तर संभाग के जिलों में सुपोषण हेतु पीडीएस के माध्यम से उन्हें 17 रूपये प्रति किलो उपभोक्ता दर पर 02 किलो गुणवत्तापूर्ण गुड़ वितरण किया जा रहा है। इससे बस्तर संभाग के 6.04 लाख अंत्योदय, प्राथमिकता, अन्नपूर्णा, एकल निराश्रित एवं नि:शक्तजन राशनकार्डधारियों को लाभ हो रहा है। भारत सरकार द्वारा अप्रैल 2019 से अनुदान प्राप्त एवं निजी आश्रम-छात्रावास एवं कल्याणकारी संस्थाओं हेतु खाद्यान्न का आबंटन बंद कर दिया गया था। राज्य सरकार द्वारा ऐसी 471 संस्थाओं में पंजीकृत 43,640 हितग्राहियों को राज्य शासन द्वारा स्वयं के व्यय से चावल आबंटित किया जा रहा है। पूर्व में राज्य के ऐसे 12.90 लाख राशनकार्डधारी परिवार जिनके पास एलपीजी कनेक्शन है, उनकी केरोसिन पात्रता समाप्त कर दी गई थी। केरोसिन और गैस की कीमतों में अंतर और लोगों की जरूरत को देखते हुए अगस्त 2019 से केरोसिन का वितरण पुन: प्रारंभ कर दिया गया है। राज्य के अनुसूचित और माडा क्षेत्र के 25 लाख अंत्योदय एवं प्राथमिकता परिवारों के भोजन में प्रोटीन की कमी पूरा करने हेतु, रियायती दर 5 रूपये प्रतिकिलो की दर पर प्रतिमाह 2 किलो चना प्रदाय किया जा रहा है। अब सामान्य राशनकार्ड पर भी 10 रूपए प्रतिकिलो की दर पर 2 किलो नमक प्रतिमाह प्रदाय किया जा रहा है। मंत्री भगत ने कहा कि सरकार ने किसानों का धान समर्थन मूल्य 2500 रूपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदने का निर्णय के अनुरूप मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देश पर मेरे नेतृत्व में यह वादा भी पूरा किया गया। किसानों को उनकी उपज का सही मूल्न्य दिलाने के लिए पहले केन्द्र सरकार द्वारा तय समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की गई। समर्थन मूल्य से अंतर की राशि प्रदान करने के लिये पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी जी की पुण्यतिथि पर राजीव गांधी किसान न्याय योजना का शुंभारंभ किया गया। खरीफ वर्ष में धान खरीदी का अभूतपुर्व रिकॉर्ड बनाया गया। खरीफ वर्ष 2019-20 में प्रदेश के 18.38 लाख किसानों से लगभग 84 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की गई। खरीदे गए धान में से 60.84 लाख टन का उठाव हो चुका है । भारत सरकार द्वारा राज्य सरकार की मांग पर केन्द्रीय पूल से चावल उपार्जन में 4 लाख मीट्रिक टन की वृद्धि की गई है।
नोवेल कोरोना वायरस (कोविड-19) के संक्रमण से बचाव हेतु लॉकडाउन के दौरान सुनिश्चित किया गया कि लोगों को लॉकडाउन अवधि का राशन एकमुश्त पहले ही मिल जाए। उन्हें भी कोई परेशानी न हो जिनके पास राशनकार्ड नहीं है। सभी के लिये खाद्यान्न व भोजन की उपलब्धता सुनिश्चित की गई। लॉकडाउन के दौरान 42.520 बीपीएल राशनकार्ड एवं 30,519 एपीएल राशनकार्ड कुल 73,039 नवीन राशनकार्ड जारी किये गये। अन्तोयदय, प्राथमिकता, एकल निराश्रित तथा नि:शक्तजन राशनकार्डधारियों को लॉकडाउन के दौरान चावल के साथ-साथ पौष्टिक चना भी नि:शुल्क वितरित किया गया। अन्य राज्यों से आए श्रमिकों, गरीब, निराश्रितों में से 28.15 लाख लोगों को गरम भोजन एवं 31.81 लाख लोगों को सूखा राशन प्रदान किया गया।
मंत्री भगत ने भविष्य की कार्ययोजना के बारे में बताया कि राज्य में वाइंट ऑफ सेल डिवाईस के माध्यम से राशन सामग्री का वितरण पीडीएस के जरिए राशन सामग्री के वितरण में पारदर्शिता तथा हितग्राही को अस्थायी प्रवास के दौरान राशन सामग्री प्राप्त करने की सुविधा देने हेतु प्वाइंट ऑफ सेल डिवाईस के माध्यम से राशन सामग्री का वितरण की व्यवस्था की जा रही है। भण्डारण क्षमता का विकास एवं उचित मूल्य दुकानों का निर्माण तथा विस्तार किया जा रहा है। राज्य के अनुसूचित विकासखण्डों और माडा क्षेत्र के 1500 भवनहीन उचित मूल्य दुकानों में नवीन दुकान सह गोदाम निर्माण एवं शहरी क्षेत्र के 200 एवं ग्रामीण क्षेत्र के 100 उचित मूल्य दुकानों में निर्मित दुकान सह गोदाम का नवीनीकरण एवं विस्तारीकरण करने के लिए कार्ययोजना बनाई गयाी है।
मंत्री भगत ने संस्कृति विभाग के उपलब्धियों के बारे में बताया कि राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव देश का सबसे बड़ा आदिवासी सांस्कृतिक समागम का आयोजन 27 से 29 दिसम्बर 2019 तक रायपुर में किया गया। इसमें देश के 24 राजय और केन्द्र शासित प्रदेश के आदिवासियों की प्रतिभागिता रहीं। साथ ही ÓÓबेलारूस, थाईलैण्ड, युगाण्डा, मालदीव, लंका, बांग्लादेश के नृत्य समूहों का भी समावेश रहा। जीवन संस्कार, अनुष्ठान और मेले, कृषि चक्र तथा अन्य पारंपरिक नृत्य आदि चार श्रेणी में प्रतियोगिताएं आयोजित कर 16 पुरस्कार राशि रूपये 41 लाख प्रदान किया गया। आयोजन में लगभग 2,000 कलाकारों द्वारा 125 से भी अधिक पारंपरिक जनजातीय नृत्यों का प्रदर्शन किया गया। इस आयोजन को राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति मिली और राष्ट्रीय एकता और सदभावना की दिशा में जागृति उत्पन्न हुई। उन्होंने कहा कि साईंस कॉलेज मैदान, रायपुर में पांच दिवसीय राज्योत्सव का आयोजन हुआ। राज्योत्सव पर छत्तीसगढ़ के पारंपरिक लोक जनजातीय नृत्य, संगीत, गीत और वाद्य यंत्रों पर प्रस्तुतियॉं आयोजित की गयी। इस अवसर पर राज्य की विभिन्न विभूतियों के नाम पर स्थापित सम्मानों के अन्तर्गत प्रतिभाओं को राज्य सम्मान से अलंकृत किया गया।

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