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कर्नाटक उपचुनाव: राज्‍य की 15 सीटों पर 5 दिसंबर को मतदान, 9 को रिजल्‍ट

चुनाव आयोग (Election Commission) ने कर्नाटक (Karnataka) की 15 विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव (Bypolls) की तारीखों का ऐलान कर दिया है. राज्‍य में 5 दिसंबर को मतदान होगा.
बेंगलुरु. चुनाव आयोग (Election Commission) ने कर्नाटक (Karnataka) की 15 सीटों पर होने वाले उपचुनाव (Bypolls) के लिए नई तारीखों की घोषणा कर दी है. राज्‍य में 5 दिसंबर को मतदान होगा और 9 दिसंबर को परिणाम आएंगे.
अयोग्‍य ठहराए गए विधायकों की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 22 अक्‍टूबर को सुनवाई करेगी. इसको देखते हुए चुनाव आयोग को राज्‍य की 15 सीटों पर होने वाले उपचुनाव के पुराने चुनाव कार्यक्रम को रद्द करना पड़ा था. अब आयोग ने सभी 15 सीटों के लिए चुनाव कार्यक्रम की घोषणा कर दी है.
इससे पहले आयोग ने कर्नाटक के अयोग्य ठहराए गए विधायकों पर सुप्रीम कोर्ट (supreme Court) का फैसला आने तक उपचुनाव को टालने का निर्णय लिया है. चुनाव आयोग ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि कर्नाटक में 15 सीटों पर होने वाले उपचुनाव को टाल दिया है. क्‍योंकि अयोग्‍य ठहराए गए विधायकों का मामला अभी लंबित है.
बता दें कि 21 सितंबर को चुनाव आयोग ने महाराष्‍ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनावों की तारीखों का ऐलान किया था. यहां पर 21 अक्‍टूबर को वोट डाले जाएंगे और 24 अक्‍टूबर को नतीजे आएंगे. वहीं आयोग ने 64 सीटों का भी ऐलान किया है, जिनपर उपचुनाव होने हैं. इनमें 1 सीट लोकसभा की है. बाकी की 63 सीटें विधानसभा की हैं. इसमें सबसे ज्‍यादा सीट कर्नाटक की हैं, जहां उपचुनाव होने हैं.
बागी विधायकों के कारण गिरी थी कर्नाटक सरकार
कर्नाटक के बागी विधायकों को अयोग्‍य ठहराए जाने का मामला अब सुप्रीम कोर्ट में है. 15 विधायकों ने कुमारस्‍वामी सरकार से समर्थन वापस लेते हुए इस्‍तीफा दे दिया था. विधानसभा स्‍पीकर ने उन्‍हें 5 साल के लिए अयोग्‍य घोषित कर दिया था. अब अयोग ने राज्‍य की 15 विधानसभा सीटों के उपचुनाव के लिए तारीखों की घोषणा कर दी है.
कर्नाटक विस अध्यक्ष ने कहा- इस्तीफे का अधिकार विधायकों का लोकतांत्रिक हक कर्नाटक विधानसभा अध्यक्ष के कार्यालय ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि किसी भी विधायक का इस्‍तीफे का हक ‘लोकतांत्रिक अधिकार’ है. यह उचित समय है कि न्यायपालिका स्पीकरों के लिहाज से दिशानिर्देश निर्धारित करे. कर्नाटक विधानसभा अध्यक्ष के कार्यालय की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने न्यायमूर्ति एन वी रमन की अध्यक्षता वाली तीन न्यायाधीशों की पीठ से कहा कि राजनीतिक दल की सदस्‍यता छोड़ने पर किसी विधायक को अयोग्‍य ठहराया जा सकता है. लेकिन, सदन से इस्‍तीफा देने पर उसे अयोग्‍य करार नहीं दिया जा सकता है.

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