नई दिल्ली: गर्मियों का मौसम आते ही कीड़े-मकौड़ों का प्रकोप बढ़ जाता है। ऐसे में कई लोग कीट के काटने पर खुजाने की गलती कर बैठते हैं, जो दरअसल एक बड़ी समस्या खड़ी कर सकती है। ताजा शोध में यह सामने आया है कि इन काटने को खुजाने पर न केवल समस्या बढ़ जाती है बल्कि यह स्वास्थ्य के लिए भी नुकसानदायक हो सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जब कोई व्यक्ति कीट के काटे स्थान को खुजाता है, तो वहां की त्वचा में सूजन और लालिमा बढ़ने लगती है, जिससे खुजली और भी तेज हो जाती है। इससे एक चकत्ते की तरह बड़ा, उभरा हुआ और अधिक खुजली वाला टिका बन सकता है, जो कई बार संक्रमण का कारण भी बन सकता है।
डाक्टरों के अनुसार, कीट के काटने से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कम होती है और खुजली करने से त्वचा की ऊपरी परत में चोट पहुँच सकती है। इससे संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है, विशेषकर जब हाथ साफ न हों। वायरस या बैक्टीरिया संक्रमण के साथ-साथ कुछ मामलों में कीट-विषैले पदार्थ भी गहरे त्वचा में प्रवेश कर सकते हैं।
रोज़ाना के व्यवहार में ज्यादा संवेदनशील बच्चों और बुजुर्गों को इस प्रकार की चमड़ी की समस्याएं अधिक प्रभावित करती हैं। इसके लिए चिकित्सा जगत ने सुझाव दिया है कि खुजली होने पर ठंडा पानी या बरफ से सिकाई करनी चाहिए, साथ ही एंटीहिस्टामीन क्रीम या दवाओं का प्रयोग डॉक्टर की सलाह अनुसार करना चाहिए। खुद से खुजाने से बचना ही सबसे सुरक्षित उपाय है।
रिसर्च रिपोर्टों में यह भी बताया गया है कि अगर कीट के काटने पर सही समय पर इलाज किया जाए तथा खुजली को नियंत्रित किया जाए तो वह ज्यादा गंभीर नहीं बनती। लेकिन लगातार खुजाने से एक छोटी सी समस्या गहरी जख्म या फोड़ में बदल सकती है, जिससे इलाज में अधिक समय और खर्च लग सकता है।
सरकार द्वारा भी कीट प्रकोप के समय लोगों को जागरूक करने के अभियान चलाए जा रहे हैं, ताकि वे कीट के काटने और उससे उपजे खतरों के प्रति सतर्क रहें और उचित कदम उठाएं। विशेषज्ञों का सुझाव है कि पर्यावरण में कीट नियंत्रण के उपायों के साथ-साथ स्वच्छता के नियमों का पालन किया जाना चाहिए।
अंत में, विशेषज्ञ याद दिलाते हैं कि यदि कीट के काटने के बाद खुजली हो तो खुद से खुजलाना पूरी तरह से बंद करें और समय रहते डॉक्टर से संपर्क करें। ऐसा करने पर जटिलताओं को रोका जा सकता है और आराम जल्दी मिल सकता है।














