नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने हाल ही में क्वॉलिटी कंट्रोल ऑर्डर (क्यूसीओ) के नियमों में महत्वपूर्ण ढील दी है, जो अगले पांच वर्षों तक लागू रहेगी। इस कदम के तहत अब चुनिंदा घरेलू कंपनियां, बीआईएस (भारतीय मानक ब्यूरो) नियमों के तहत स्कीम II के अंतर्गत लाइसेंसधारक निर्माताओं से आपूर्ति प्राप्त कर सकेंगी, जबकि इससे पहले यह प्रतिबंध स्कीम I के तहत अधिक कड़ी प्रक्रिया के कारण था।
इस नई व्यवस्था का उद्देश्य घरेलू उद्योगों को प्रोत्साहित करना और आपूर्ति श्रृंखला को सरल बनाना है। स्कीम I के तहत सख्त परीक्षण और निरीक्षण आवश्यकताएं होती हैं, जबकि स्कीम II अधिक लचीली है, जिससे कंपनियों को आवश्यक वस्तुओं की खरीदारी में आसानी होगी।
सूत्रों के अनुसार, सरकार ने यह निर्णय स्थानीय विनिर्माण को बढ़ावा देने और उत्पादन लागत को कम करने के लिए लिया है। इससे न केवल उद्योग क्षेत्र को राहत मिलेगी, बल्कि उपभोक्ताओं को भी गुणवत्तापूर्ण और किफायती उत्पाद उपलब्ध होंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव घरेलू बाजार में प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देगा और निर्यात में भी वृद्धि होगी। साथ ही, यह कदम उन कंपनियों के लिए भी लाभदायक होगा जो कम तकनीकी संसाधनों के बावजूद गुणवत्ता मानकों को पूरा करने में सक्षम हैं।
केंद्रीय मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि नियमों में यह ढील केवल उन क्षेत्रों पर लागू होगी जहाँ यह बदलाव आवश्यक समझा गया है और अन्य क्षेत्रों में कड़े मानक जारी रहेंगे। नीति निर्माताओं का कहना है कि इससे उद्योगों की उत्पादन क्षमता और आपूर्ति श्रृंखला दोनों में मजबूती आएगी।
इसके अतिरिक्त, यह संशोधन बीआईएस के विभिन्न नियामक प्रावधानों के तहत एक संतुलित और व्यावहारिक दृष्टिकोण को दर्शाता है, जो गुणवत्ता और उत्पादन दोनों कारकों को ध्यान में रखता है।
इस पहल के परिणामस्वरूप उद्योग जगत में सकारात्मक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं और कई विशेषज्ञ इसे आर्थिक विकास को बढ़ावा देने में सहायक मानते हैं। सरकार ने आश्वासन दिया है कि यह नीति समय-समय पर समीक्षा की जाएगी और आवश्यकतानुसार सुधार किए जाएंगे ताकि भारत का उत्पादक वातावरण और अधिक प्रतिस्पर्धी बन सके।













