नई दिल्ली, 27 अप्रैल: मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPI(M)) के राज्य सचिव श्रीनिवास राव ने सरकार द्वारा बिजली दरों में कमी के दावों को भ्रामक बताया है। उन्होंने कहा कि सरकार बिजली दरों में मामूली कटौती को हाइलाइट करके जनता को गुमराह कर रही है, जबकि इससे पहले की गई कीमतों में भारी वृद्धि ने उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ डाला है।
श्रीनिवास राव ने आगे कहा, “सरकार ने पिछले कुछ महीनों में बिजली शुल्क में असाधारण रूप से वृद्धि की है, जिसके कारण आम जनता खासतौर पर मध्यम और निम्न आय वर्ग के लोग आर्थिक रूप से प्रभावित हुए हैं। अब जब वे मामूली कटौतियों की बात कर रहे हैं, तो यह वास्तविक स्थिति को छुपाने का प्रयास है।”
CPI(M) के अनुसार, बिजली की मौजूदा दरों में किए गए संशोधन न केवल उपभोक्ताओं के लिए परेशानी का कारण बने हैं, बल्कि इससे आर्थिक असमानता भी बढ़ी है। राव ने कहा कि ऊर्जा की मूलभूत सेवाएं सरकार की जिम्मेदारी हैं और यह आवश्यक है कि बिजली की उपलब्धता और दरों में पारदर्शिता हो।
इस संबंध में, उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह वास्तविक और स्थायी उपाय अपनाए जिससे बिजली दरों में संतुलित कमी हो और उपभोक्ताओं को राहत मिले। इसके साथ ही राव ने यह भी कहा कि CPI(M) इस मुद्दे पर जनता के साथ खड़ा रहेगा और लगातार जांच करता रहेगा कि सरकार की नीतियां किस प्रकार से आम लोगों पर प्रभाव डाल रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि बिजली शुल्क में बार-बार बदलाव से उपभोक्ताओं को योजना बनाने में कठिनाई होती है और आर्थिक अस्थिरता बढ़ती है। इससे घरेलू बजट प्रभावित होता है और सामाजिक विकास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
अतः सरकार से यह अपेक्षा की जाती है कि वह उपभोगताओं की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए उचित और स्थायी कदम उठाए ताकि ऊर्जा क्षेत्र में संतुलन और पारदर्शिता बनी रहे। CPI(M) के नेता श्रीनिवास राव की यह प्रतिक्रिया इस दिशा में एक महत्वपूर्ण आलोचना के रूप में देखी जा रही है।















