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जयराम रमेश ने सोनोवाल को लिखा पत्र, ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट के ट्रांसशिपमेंट पोर्ट पर मांगी स्पष्टीकरण

Jairam Ramesh writes to Sonowal, seeks clarifications on Great Nicobar project's transhipment port

नई दिल्ली: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण सवाल उठाया है जो देश के बंदरगाह और हवाई अड्डा नीति से जुड़ा हुआ है। उन्होंने यह पूछा कि क्या बंदरगाहों के निजीकरण में विविधता लाई जाएगी या फिर हवाई अड्डों की स्थिति पर कायम रखा जाएगा, जहां वर्तमान में छह बेचे गए हवाई अड्डों में से एक ही निजी कंपनी का कब्जा है।

जयराम रमेश की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब भारत सरकार निजी क्षेत्र की भूमिका बढ़ाने के लिए विभिन्न अवसंरचनात्मक प्रोजेक्ट्स में तेजी से निवेश कर रही है। खासकर, ग्रेट निकोबार परियोजना के ट्रांसशिपमेंट पोर्ट को लेकर यह सवाल और भी अधिक प्रासंगिक हो गया है। उन्होंने असम के पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री सर्वानंद सोनोवाल को लिखे पत्र में इस परियोजना के नियोजन और क्रियान्वयन संबंधी स्पष्ट जानकारी मांगी है।

रमेश ने बताया कि जबकि निजी क्षेत्र का निवेश आवश्यक है, इससे प्रतिस्पर्धा भी सुनिश्चित होनी चाहिए। यदि केवल एक ही निजी कंपनी बड़ी मात्रा में बंदरगाहों या हवाई अड्डों का नियंत्रण कर लेती है, तो यह बाजार में असंतुलन पैदा कर सकता है और आर्थिक दृष्टि से नुकसानदेह साबित हो सकता है।

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या सरकार हर प्रोजेक्ट में पारदर्शिता और खुले प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित कर रही है या फिर कुछ बड़े खिलाड़ियों के लिए दरवाज़े पहले से ही बंद हैं। जयराम रमेश ने इसे लेकर एक व्यापक नीति समीक्षा की मांग की है ताकि देश के रणनीतिक बुनियादी ढांचे का विकास निष्पक्ष और समावेशी तरीके से हो सके।

वहीं दूसरी ओर, सरकार का यह मानना है कि निजी क्षेत्र की भागीदारी से प्रोजेक्ट्स की लागत कम होगी और कार्यक्षमता बढ़ेगी। इससे आर्थिक विकास के साथ-साथ रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। ग्रेट निकोबार के ट्रांसशिपमेंट पोर्ट प्रोजेक्ट से देश के खाड़ी क्षेत्र में समुद्री परिवहन को बेहतर बनाने की उम्मीद है, जो भारत के सामरिक और व्यावसायिक हितों के लिए महत्वपूर्ण है।

हालांकि, जयराम रमेश का सुझाव है कि नीति निर्धारकों को सुनिश्चित करना चाहिए कि निजीकरण एक उचित संतुलन के साथ हो जहां छोटे और मध्यम निवेशकों को भी अवसर मिले। उन्होंने कहा, “हमें यह देखना होगा कि क्या हम हवाई अड्डों जैसा परिस्थिति दोहराना चाहते हैं या बंदरगाह क्षेत्रों में व्यापक और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देंगे।”

ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट तथा इसके ट्रांसशिपमेंट पोर्ट की निगरानी और क्रियान्वयन प्रभावी ढंग से हो, इसके लिए आम जनता को पूरी तरह से जानकारी देना और सवाल-जवाब का स्थान खुला रखना आवश्यक है, ताकि किसी भी तरह के विवाद या भ्रांतियों से बचा जा सके।

इस संदर्भ में आने वाले दिनों में भारतीय संसद या संबंधित मंत्रालयों से भी इस मामले पर स्पष्ट पक्ष जानने की उम्मीद की जा रही है। जयराम रमेश द्वारा उठाए गए मुद्दे निजीकरण की नीति और रणनीति पर पुनर्विचार के बहाने सरकार के लिए तर्कपूर्ण बहस का अवसर प्रस्तुत करते हैं।

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