नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने हाल ही में पेट्रोल, डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) के निर्यात पर लगने वाले शुल्क में संशोधन की घोषणा की है। यह संशोधन पहली जून से लागू होगा जिसके तहत पेट्रोल के निर्यात शुल्क को ₹1.5 प्रति लीटर, डीजल के लिए ₹13.5 प्रति लीटर और एटीएफ के लिए ₹9.5 प्रति लीटर निर्धारित किया गया है।
सरकारी अधिसूचना के अनुसार ये नई दरें आगामी पखवाड़े यानी 1 जून से 15 जून तक प्रभावी रहेंगी। वहीं घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है, जिससे उपभोक्ताओं की दैनिक जिंदगी पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम ईंधन की घरेलू उपलब्धता को बनाए रखने के लिए उठाया गया है, ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निर्यात गतिविधियों में तालमेल बना रहे। उन्होंने बताया कि विदेशों में ईंधन की बढ़ती मांग और घरेलू जरूरतों के बीच संतुलन साधना सरकार की प्राथमिकता बन गई है।
पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि निर्यात शुल्क बढ़ाने का उद्देश्य घरेलू बाजार में आपूर्ति को सुनिश्चित करना और साथ ही सरकारी राजस्व में स्थिरता बनाये रखना है। उन्होंने कहा कि निर्यात पर लगाए गए ये शुल्क अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की कीमतों पर भी नजर रखते हुए तय किए गए हैं।
इससे पहले, पेट्रोल और डीजल के निर्यात पर लगी सीमा शुल्क दरों को लेकर बाजार में कई अटकलें लग रही थीं। इन संशोधनों से स्पष्ट तौर पर पता चलता है कि सरकार ईंधन की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ-साथ विदेशी मुद्रा अर्जन के लिए भी प्रयासरत है।
विश्लेषकों का कहना है कि मौजूदा वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और ऊर्जा संकट के बीच यह कदम समयानुकूल है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि निर्यात शुल्क में भविष्य में आवश्यकतानुसार समायोजन किये जा सकते हैं ताकि घरेलू आपूर्ति प्रभावित न हो।
अंत में, यह कहना उचित होगा कि सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं की सुरक्षा एवं ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह नीति बनाई है, जो आने वाले दिनों में देश के ईंधन बाजार की स्थिरता में अहम भूमिका निभाएगी।














