नई दिल्ली। हाल ही में जारी एक 33 पेज की रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि साइबर अपराधी काकरोच जनता पार्टी (Cockroach Janta Party – CJP) की लोकप्रियता का गलत फायदा उठाते हुए GenZ को ठगने के लिए एक नकली एंड्रॉइड ऐप का उपयोग कर रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह नकली ऐप स्वाभाविक तौर पर CJP के आधिकारिक ऐप के रूप में पेश किया जा रहा है, लेकिन इसकी असली मंशा उपयोगकर्ताओं के उपकरणों को हैक करना और उनकी संवेदनशील जानकारियां चुराना है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि ये नकली ऐप मालवेयर की तरह कार्य करता है और जब उपयोगकर्ता इसे अपने मोबाइल पर इंस्टॉल करते हैं, तो यह उनके फोन की सुरक्षा प्रणाली को भेदने की कोशिश करता है। इसके जरिए अपराधी उपयोगकर्ताओं के निजी डेटा, जैसे कि संपर्क, संदेश, बैंकिंग जानकारी आदि, चुरा लेते हैं। यह सुरक्षा जोखिम युवाओं, खासकर GenZ वर्ग के लिए गंभीर खतरा पैदा करता है क्योंकि वे डिजिटल दुनिया में अधिक सक्रिय और संवेदनशील होते हैं।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने इस मामले पर चिंता जताते हुए कहा कि डिजिटल जागरूकता और सतर्कता इस स्थिति से निपटने का एक मात्र उपाय है। उन्होंने सुझाव दिया है कि उपयोगकर्ता केवल भरोसेमंद स्रोतों से ही ऐप डाउनलोड करें और किसी भी ऐप की विश्वसनीयता जांचे बिना अपने मोबाइल पर इंस्टॉल करने से बचें।
काकरोच जनता पार्टी ने भी इस मामले में आधिकारिक बयान जारी किया है, जिसमें उन्होंने लोगों से आग्रह किया है कि वे केवल उनके आधिकारिक चैनलों जैसे कि वेब पोर्टल या विश्वसनीय ऐप स्टोर से ही उनकी सेवाओं का उपयोग करें। पार्टी ने कहा कि वे इस तरह के साइबर हमलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की योजना बना रहे हैं और संबंधित एजेंसियों के साथ सहयोग भी करेंगे।
इस रिपोर्ट में अतिरिक्त रूप से यह तथ्य भी सामने आया है कि साइबर अपराधी खासतौर पर GenZ को निशाना बनाकर काम कर रहे हैं क्योंकि यह समूह तकनीकी रूप से जानकार तो है, लेकिन डिजिटल सुरक्षा के प्रति पूरी तरह सतर्क नहीं रहता। इस कारण, फेक ऐप की मदद से उनके डेटा और पहचान की चोरी संभव हो पाती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के खतरों से बचने के लिए नियमित तौर पर फोन और ऐप्स की सुरक्षा अपडेट करना जरूरी है। इसके अलावा संदिग्ध लिंक या ऐप्स से दूरी बनाए रखना भी आवश्यक है। जागरूकता ही इस बढ़ते खतरे का सबसे प्रभावी हथियार है।
सरकारी एजेंसियां और साइबर सुरक्षा संगठन इस संदर्भ में जागरूकता अभियान चला रहे हैं ताकि जनता को इस प्रकार के जालसाजी से बचाया जा सके। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि उपयोगकर्ताओं को तुरंत ऐसी किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना संबंधित अधिकारियों को देनी चाहिए ताकि हमलावरों को पकड़ा जा सके और इस खतरे को कम किया जा सके।
इस साइबर खतरे के मद्देनजर विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि हर डिजिटल उपयोगकर्ता को सतर्क रहना चाहिए और किसी भी नए ऐप को डाउनलोड करने या अपने निजी डाटा को साझा करने से पहले उसकी प्रामाणिकता की जांच करनी चाहिए।













