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शिक्षा के क्षेत्र में सिक्किम की बड़ी उपलब्धि, देश का पांचवां पूर्ण साक्षर राज्य बना

सिक्किम ने शिक्षा के क्षेत्र में एक नई उपलब्धि हासिल करते हुए खुद को देश के पूर्ण साक्षर राज्यों की सूची में शामिल कर लिया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गंगटोक में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान सिक्किम को देश का पांचवां पूर्ण साक्षर राज्य घोषित किया। यह घोषणा ULLAS पहल के अंतर्गत की गई, जिसका उद्देश्य समाज के हर वर्ग तक शिक्षा पहुंचाना और आजीवन सीखने की भावना को मजबूत करना है।

यह कार्यक्रम गंगटोक के मनन केंद्र में आयोजित सिक्किम विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह के दौरान हुआ। राष्ट्रपति की मौजूदगी में की गई इस घोषणा को राज्य के लिए ऐतिहासिक क्षण माना जा रहा है। सिक्किम अब उन चुनिंदा राज्यों में शामिल हो गया है जिन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है।

पूर्वोत्तर भारत में सिक्किम तीसरा पूर्ण साक्षर राज्य बना है। इससे पहले मिजोरम और त्रिपुरा यह उपलब्धि हासिल कर चुके हैं। वहीं राष्ट्रीय स्तर पर गोवा और हिमाचल प्रदेश भी पूर्ण साक्षर राज्यों की सूची में शामिल हैं। इस उपलब्धि के बाद सिक्किम की शिक्षा व्यवस्था और सरकारी प्रयासों की पूरे देश में चर्चा हो रही है।

ULLAS योजना को राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत शुरू किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य केवल पढ़ना-लिखना सिखाना नहीं, बल्कि लोगों को कौशल विकास, डिजिटल शिक्षा और जीवनभर सीखने के अवसर उपलब्ध कराना भी है। इस योजना के जरिए खास तौर पर उन लोगों को शिक्षा से जोड़ने का प्रयास किया गया जो किसी कारणवश पहले पढ़ाई पूरी नहीं कर पाए थे।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षा किसी भी राष्ट्र की प्रगति का आधार होती है। उन्होंने सिक्किम सरकार की सराहना करते हुए कहा कि राज्य ने शिक्षा के क्षेत्र में एक मिसाल कायम की है। राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि पूर्ण साक्षरता से समाज में जागरूकता, समानता और आत्मविश्वास बढ़ता है।

मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने राज्यवासियों को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह सफलता सरकार की दूरदर्शी नीतियों और जनता के सहयोग का परिणाम है। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा के माध्यम से ही समाज को सशक्त बनाया जा सकता है और उनकी सरकार इसी दिशा में लगातार काम कर रही है।

राज्य सरकार के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में चलाए गए साक्षरता अभियान, सामुदायिक भागीदारी और डिजिटल लर्निंग कार्यक्रमों ने इस उपलब्धि में अहम भूमिका निभाई। विशेषज्ञों का मानना है कि सिक्किम की यह सफलता देश के अन्य राज्यों के लिए प्रेरणा बनेगी और शिक्षा के महत्व को और अधिक मजबूत करेगी।

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