Indian National Congress में राज्यसभा चुनाव 2026 को लेकर सियासी हलचल अपने चरम पर पहुंच गई है। चुनाव आयोग द्वारा राज्यसभा की 24 सीटों और दो उपचुनावों की तारीखों की घोषणा के बाद पार्टी के भीतर टिकट के दावेदार सक्रिय हो गए हैं। कांग्रेस को इस चुनाव में पांच से छह सीटें मिलने की संभावना जताई जा रही है, लेकिन दावेदारों की संख्या इससे कई गुना ज्यादा है। यही वजह है कि पार्टी नेतृत्व के सामने संतुलन बनाने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
कांग्रेस के लिए यह चुनाव सिर्फ संसद में संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संगठनात्मक रणनीति और राजनीतिक संदेश देने का भी अहम अवसर माना जा रहा है। पार्टी को तय करना है कि वह अनुभवी नेताओं को तरजीह दे या नई पीढ़ी को आगे बढ़ाने का जोखिम उठाए।
कर्नाटक कांग्रेस इस समय सबसे ज्यादा चर्चा में है। राज्य की चार सीटों में से कांग्रेस को तीन सीटें मिलने की उम्मीद है। इनमें से एक सीट पर Mallikarjun Kharge का जाना लगभग तय माना जा रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष होने के नाते खरगे को दोबारा उच्च सदन भेजना पार्टी की प्राथमिकता है।
हालांकि बाकी दो सीटों को लेकर कर्नाटक कांग्रेस में खींचतान तेज हो गई है। मुख्यमंत्री Siddaramaiah और उपमुख्यमंत्री D. K. Shivakumar के बीच अंदरूनी प्रतिस्पर्धा खुलकर सामने आ रही है। डीके शिवकुमार अपने भाई D. K. Suresh को राज्यसभा भेजना चाहते हैं, जबकि सिद्धरमैया अपने करीबी नेताओं के लिए टिकट की मांग कर रहे हैं।
मध्यप्रदेश में भी कांग्रेस के लिए फैसला आसान नहीं है। यहां पार्टी को केवल एक सीट मिलने की संभावना है, लेकिन दावेदारों की लंबी सूची नेतृत्व की मुश्किलें बढ़ा रही है। Digvijaya Singh सार्वजनिक रूप से राज्यसभा की दौड़ से खुद को अलग बता चुके हैं, लेकिन पार्टी के भीतर अभी भी उनके नाम की चर्चा जारी है।
दूसरी ओर पूर्व मुख्यमंत्री Kamal Nath भी राज्यसभा के जरिए राष्ट्रीय राजनीति में वापसी करना चाहते हैं। माना जा रहा है कि कमलनाथ सक्रिय राजनीति में अपनी भूमिका को फिर मजबूत करना चाहते हैं। वहीं पार्टी नेतृत्व नई पीढ़ी के नेताओं को मौका देने पर भी विचार कर रहा है। इस क्रम में Meenakshi Natarajan और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष Jitu Patwari के नाम चर्चा में हैं।
राजस्थान में भी समीकरण दिलचस्प बने हुए हैं। यहां पार्टी के भीतर यह चर्चा तेज है कि पूर्व मुख्यमंत्री Ashok Gehlot को राज्यसभा भेजा जा सकता है। यदि ऐसा होता है तो राजस्थान कांग्रेस में नई पीढ़ी को आगे लाने की रणनीति मजबूत होगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इससे Sachin Pilot के लिए राज्य की राजनीति में बड़ा अवसर तैयार हो सकता है।
हालांकि गहलोत अब तक इस मुद्दे पर खुलकर सामने नहीं आए हैं। माना जा रहा है कि पार्टी नेतृत्व उनके फैसले का इंतजार कर रहा है। यदि गहलोत राज्यसभा जाते हैं तो राजस्थान कांग्रेस में बड़े संगठनात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
इधर कांग्रेस मीडिया विभाग के प्रमुख Pawan Khera का नाम भी संभावित उम्मीदवारों में शामिल है। हाल के राजनीतिक विवादों और कानूनी मामलों के बाद पार्टी के भीतर उनके लिए सहानुभूति का माहौल बताया जा रहा है।
झारखंड में Jharkhand Mukti Morcha और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे को लेकर बातचीत जारी है। माना जा रहा है कि एक सीट झामुमो को और दूसरी कांग्रेस को मिल सकती है।
वहीं तमिलनाडु में उपचुनाव वाली सीट को लेकर भी राजनीतिक हलचल तेज है। चर्चा है कि मुख्यमंत्री विजय अपनी पार्टी टीवीके के लिए सीट रखना चाहते हैं या कांग्रेस को समर्थन देना चाहते हैं। यदि कांग्रेस को मौका मिलता है तो Praveen Chakravarty का नाम मजबूत दावेदार माना जा रहा है।
कुल मिलाकर राज्यसभा चुनाव 2026 कांग्रेस के लिए राजनीतिक संतुलन, क्षेत्रीय समीकरण और संगठनात्मक रणनीति की बड़ी परीक्षा बन गया है।















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