National

India: UN rights office urges ‘maximum restraint’ in ongoing protests

Human Rights

The United Nations human rights office (OHCHR) has called on authorities and protesters in India to “exercise maximum restraint” amidst ongoing protests by farmers.

In a Tweet on Friday, OHCHR also highlighted the need for equitable solutions with due respect for human rights.

“We call on the authorities and protesters to exercise maximum restraint in ongoing farmers protests. The rights to peaceful assembly and expression should be protected both offline and online”, the office said.
“It is crucial to find equitable solutions with due respect to human rights for all”, it added.
According to media reports, thousands of farmers, including women and the elderly, have been protesting on the outskirts of capital Delhi for over two months, against reforms to agriculture laws. They came with tractors and lorries, and set up camps along the highways, blocking major arteries into the city.
Though protests started off largely peacefully, violence flared on 26 January when some farmers drove into the city, clashing with security forces. One protester was reportedly killed and more than 300 police personnel wounded.
Media reports added that internet services were shut off in areas where the protesters were camped in, and barricades set up by authorities.

भारत: किसान प्रदर्शनों के मद्देनज़र, सभी पक्षों से अधिकतम संयम बरतने का आग्रह

मानवाधिकार

संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (OHCHR) ने भारत में, किसानों द्वारा लगभग दो महीनों से किये जा रहे प्रदर्शनों के मद्देनज़र, सरकारी अधिकारियों और प्रदर्शनकारी किसानों से “अधिकतम संयम बरतने” का आग्रह किया है.

संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (OHCHR) ने भारत में, किसानों द्वारा लगभग दो महीनों से किये जा रहे प्रदर्शनों के मद्देनज़र, सरकारी अधिकारियों और प्रदर्शनकारी किसानों से “अधिकतम संयम बरतने” का आग्रह किया है.
यूएन मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय ने शुक्रवार को एक ट्वीट सन्देश में, निष्पक्ष व न्यायसंगत और मानवाधिकारों का सम्मान करने वाले समाधान निकाले जाने पर भी ज़ोर दिया. मानवाधिकार कार्यालय के सन्देश में कहा गया है, “किसानों के प्रदर्शनों के मद्देनज़र, हम सरकार और प्रदर्शनकारी किसानों से अधिकतम संयम बरतने का आहवान करते हैं. शान्तिपूर्ण तरीक़े से एकत्र होने और अभिव्यक्ति के अधिकारों का सम्मान, ऑनलाइन और ज़मीनी परिस्थितियों, दोनों में ही किया जाना चाहिये.”
यूएन मानवाधिकार कार्यालय का कहना है, “ये बहुत आवश्यक है कि सभी के मानवाधिकारों का सम्मान करते हुए, न्यायसंगत व निष्पक्ष समाधान तलाश किये जाएँ.”
मीडिया ख़बरों के अनुसार, भारत की राजधानी दिल्ली के कुछ सीमावर्ती इलाक़ों में, महिलाओं और वृद्धों सहित, हज़ारों किसान, भारत की केन्द्रीय सरकार के तीन नए कृषि क़ानूनों के विरोध में, पिछले लगभग दो महीनों से प्रदर्शन कर रहे हैं.
ये किसान ट्रैक्टर और अन्य वाहनों में सवार होकर आए हैं, और उन्होंने मुख्य सड़कों के आसपास शिविर लगा लिये हैं, जिससे राजधानी दिल्ली में पहुँचने वाले प्रमुख रास्ते बाधित हुए हैं. वैसे तो, ये प्रदर्शन मुख्यतः शान्तिपूर्ण तरीक़े से ही शुरू हुए, मगर 26 जनवरी को उस समय हिंसा भड़क उठी जब कुछ किसानों ने राजधानी दिल्ली में जबरन प्रवेश किया, जहाँ सुरक्षा बलों के साथ उनकी झड़पें भी हुईं. ख़बरों के अनुसार एक प्रदर्शनकारी की मौत हो गई और 300 से अधिक लोग घायल हुए. मीडिया ख़बरों के अनुसार, प्रदर्शनकारी किसान जिन स्थानों पर अपने शिविर लगाए हुए हैं, वहाँ इंटरनेट सेवाएँ बन्द कर दी गई हैं, और अधिकारियों ने रास्ते रोकने के लिये अनेक तरह के अवरोधक लगाए हैं.

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