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नई सदी के अनुरूप ई-साक्षरता केन्द्रों में डिजिटल साक्षरता

मुख्यमंत्री शहरी साक्षरता कार्यक्रम –

साक्षरता दिवस मनाने का उद्देश्य व्यक्ति, समुदाय और समाज को साक्षरता का महत्व बताना है। यूनेस्को में शिक्षा पर वैश्विक प्रतिवेदन आया, जिसमें विभिन्न देशों का साक्षरता स्तर शामिल था, जो बहुत कम था। साक्षरता दर को बढ़ाने के उद्देश्य से साक्षरता दिवस मनाने की घोषणा की गई जिससे समुदाय और समाज में साक्षरता के प्रति जागरूकता आए और व्यक्ति पढ़ने के लिए प्रेरित हो। 26 अक्टूबर 1966 में यूनेस्को की सामान्य सभा में 14वें सत्र में 8 सितम्बर को अन्तर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाने की घोषणा की गई। सबसे पहले 1967 में साक्षरता दिवस मनाया गया।
यूनेस्को ने साक्षरता दिवस का हर वर्ष एक विषय के रूप में मनाने की घोषणा की जाती है। पूर्व के वर्षों में ‘साक्षरता और स्वास्थ्य’, ‘साक्षरता और सशक्तीकरण’, साक्षरता और शांति जैसे विषयों पर अन्तर्राष्ट्रीय दिवस मनाया गया। यूनेस्को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर साक्षरता पुरस्कार भी प्रदान करता है। किंग सीजोंग पुरस्कार और कन्फयूशियस साक्षरता पुरस्कार साक्षरता के क्षेत्र में श्रेष्ठ कार्य करने वाले देश को प्रदान किया जाता है। इस वर्ष यूनेस्को में साक्षरता दिवस को ‘साक्षरता और बहुभाषा’ विषय पर मनाने की घोषणा की है। छत्तीसगढ़ में वर्तमान में राज्य साक्षरता मिशन प्राधिकरण ‘मुख्यमंत्री शहरी कार्यात्मक साक्षरता कार्यक्रम का संचालन किया जा रहा है। यह कार्यक्रम प्रदेश के 27 जिलों के 36 केन्द्रों में संचालित हो रहा है। इसका उद्देश्य शहरी महिलाओं को डिजिटल साक्षर बनाना है। यहां संचालित केन्द्रों में आकर महिलाएं डिजिटल साक्षर बन उसका अपने जीवन में उपयोग कर रही हैं। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल राजधानी रायपुर में 28 फरवरी 2019 को ‘मुख्यमंत्री शहरी कार्यात्मक साक्षरता कार्यक्रम’ का शुभारंभ किया था। साक्षरता केन्द्र शुरू होने के बाद अब तक 3 माह में 2700 शिक्षार्थी डिजिटल साक्षर बने हैं।
21वीं सदी संचार तकनीक की सदी है। सूचना संचार तकनीक से समृद्ध जनमानस राज्य के विकास में महती भूमिका निभा सकते हैं और दैनिक जीवन में ई-साक्षरता का उपयोग करके अपने जीवन को बेहतर बना सके। इस सुविचार के साथ मुख्यमंत्री शहरी कार्यात्मक साक्षरता कार्यक्रम शुरू किया गया है।
डिजिटल साक्षरता के माध्यम से उन्हें कम्प्यूटर के साथ सभी प्रकार के डिजिटल उपकरणों जैसे टेबलेट, मोबाइल आदि उपकरणों से परिचित कराते हुए उन्हें इसका चलाना सिखाया जा रहा है। इसी तरह इंटरनेट का उपयोग, ऑनलाइन सेवा के द्वारा शासन की विभिन्न योजनाओं और लक्ष्यों की जानकारी प्राप्त करने, ई-आवेदन जमा करने, कैश-लेस लेनदेन, ई-भुगतान, डिजिटल लॉकर का उपयोग करने व दस्तावेजों की ई-शेयरिंग करने जैसे कार्य भी सिखाए जाएंगे। इसी तरह ई-मेल, अत्यावश्यक सेवा जैसे रेल और बस का टिकट बुक करना, मोबाइल एवं टी.व्ही. रिचार्ज, बिजली बिल भुगतान, गैस सिलेण्डर बुक करना जैसे व्यावहारिक प्रयोग भी सिखाए जा रहे हैं। इसके साथ ही आत्मरक्षा, आखर अंजोर श्रेष्ठ पालकत्व, चुनावी साक्षरता, विधिक साक्षरता, वित्तीय साक्षरता, व्यक्तित्व विकास नागरिक कर्त्तव्य, जीवन मूल्यों जैसे विषयों पर भी प्रशिक्षित किया जा रहा है।
इस योजना का उद्देश्य साक्षरता क्रांति के दौर में छत्तीसगढ़ के नागरिकों को अधिक डिजिटल साक्षर बनाना उन्नत तकनीक से उनकी कार्यक्षमता का उन्नयन करना है। इसके लिए नगरीय निकायों में वंचित वर्ग तक ई-साक्षरता की पहंुच बनाना प्रारंभ हो गया है।
मुख्यमंत्री ई-साक्षरता केन्द्रों में 25-25 के बैच में ई-साक्षरता से वंचित 14 वर्ष से 60 वर्ष तक के लोगों को ई-एजुकेटर्स द्वारा एक-एक माह का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। छत्तीसगढ़ इन्फोटेक प्रमोशन सोसायटी (चिप्स) द्वारा प्रत्येक माह इन प्रशिक्षण केन्द्रों का आंतरिक मूल्यांकन किया जाएगा। प्रशिक्षण के उपरांत परीक्षा में पास लोगों को डिजिटल हस्ताक्षर वाला प्रमाण पत्र प्रदान किया जाता है।
छत्तीसगढ़ राज्य के शहरी क्षेत्रों में डिजीटल साक्षरता से वंचित लोगों तक डिजिटल उपकरणों का व्यवहारिक ज्ञान प्रदान करने और उन्हें इसके उपयोग के लिए समर्थ बनाने की दृष्टि से मुख्यमंत्री शहरी कार्यात्मक साक्षरता कार्यक्रम प्रारंभ किया गया है। इसके तहत प्रदेश में प्रथम चरण में 36 मुख्यमंत्री ई-साक्षरता केन्द्र शुरू हो गए हैं। प्रदेश के 27 जिलों में जहां 36 ई-साक्षरता केन्द्र प्रारंभ हो चुके हैं, उनमें सरगुजा के अम्बिकापुर में दो केन्द्र लाइवलीहुड कॉलेज और गांधी नगर, सूरजपुर के जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय, बलरामपुर में प्रज्ञा शाला, कोरिया में नगर पालिका परिषद मनेन्द्रगढ़ और नगर पालिका परिषद बैकुण्ठपुर, जशपुर में जिला ग्रंथालय, बिलासपुर में तिलक नगर 01 और जनपद स्कूल बिल्हा, मुंगेली में मिशन स्कूल दाऊ पारा, जांजगीर-चांपा में जीवनलाल साव सामुदायिक भवन चांपा और डाइट परिसर जांजगीर-चांपा, कोरबा में जनपद पंचायत कटघोरा और पुराना बस स्टैण्ड सिटी कोतवाली के सामने टाऊन स्कूल कोरबा, रायगढ़ में जिला पंचायत के सामने जतन कार्यालय कमरा नम्बर दो चक्रधर नगर बोइरदादर, रायपुर में सिद्धार्थ चौक टिकपारा और नगर पालिका निगम बिरगांव, धमतरी में शासकीय बालक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय शोभाराम देवांगन बिलाईमाता रोड, गरियाबंद में पुराना जिला पंचायत, महासमुंद में वार्ड नम्बर 27 नगर पालिका परिषद, बलौदाबाजार की रघुनाथ प्राथमिक शाला, बेमेतरा के जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय, राजनांदगांव के सदर बाजार संकुल भवन और शासकीय प्राथमिक शाला लखोली, कबीरधाम की प्रमुख प्राथमिक शाला कवर्धा, बस्तर के नाइकचुरा और भगत सिंह माध्यमिक शाला पत्थरागुड़ा लालबाग, सुकमा का कुम्हारपारा सामुदायिक भवन, कोण्डागांव के नगर पालिका रेन बसेरा, कांकेर के जनकपुर वार्ड का संकुल केन्द्र भवन, नारायणपुर के पूर्व कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बंगलापारा, बीजापुर के शासकीय गर्ल्स हायर सेकेण्डरी स्कूल और दंतेवाड़ा के हुडको कॉलोनी, दुर्ग जिले की नगर पालिका निगम परिषद पाटन, भिलाई के खुर्सीपार तथा बालोद नगर लिका परिषद के केन्द्र शामिल हैं।

ललित चतुर्वेदी

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