नई दिल्ली, दिल्ली
भारत स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करने की तैयारी कर रहा है। केंद्र सरकार ने वर्ष 2033 तक कम से कम पांच स्वदेशी स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (Small Modular Reactor – SMR) स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। यह पहल देश की बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने, जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने और कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर भविष्य में भारत के ऊर्जा क्षेत्र में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकते हैं।
परमाणु ऊर्जा विभाग के राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने संसद में लिखित उत्तर देते हुए बताया कि परमाणु ऊर्जा आयोग ने 220 मेगावाट और 55 मेगावाट क्षमता वाले स्वदेशी छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों के लिए महाराष्ट्र के तारापुर को परियोजना स्थल के रूप में मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं को चरणबद्ध तरीके से विकसित किया जाएगा और भविष्य में देश के अन्य हिस्सों में भी ऐसी परियोजनाओं की संभावनाओं का अध्ययन किया जाएगा।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) कार्य कर रहा है। संस्थान 220 मेगावाट क्षमता वाले भारत एसएमआर के अलावा 55 मेगावाट क्षमता वाले छोटे रिएक्टर और स्वच्छ हाइड्रोजन उत्पादन के लिए विशेष रूप से डिजाइन किए गए हाई टेम्परेचर गैस-कूल्ड रिएक्टर का विकास भी कर रहा है। सरकार का उद्देश्य केवल बिजली उत्पादन बढ़ाना ही नहीं, बल्कि भविष्य की हरित ऊर्जा तकनीकों को भी मजबूत करना है।
विशेषज्ञों के अनुसार, छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर पारंपरिक बड़े परमाणु संयंत्रों की तुलना में कई दृष्टियों से अधिक उपयोगी माने जाते हैं। इनका निर्माण अपेक्षाकृत कम समय में किया जा सकता है, लागत भी कम होती है और इन्हें आवश्यकता के अनुसार अलग-अलग स्थानों पर स्थापित किया जा सकता है। आधुनिक सुरक्षा प्रणालियों से लैस होने के कारण इन रिएक्टरों में जोखिम भी अपेक्षाकृत कम माना जाता है। इसके अलावा इनसे बिजली उत्पादन के दौरान कार्बन उत्सर्जन बेहद कम होता है, जिससे जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने में मदद मिलती है।
भारत ने वर्ष 2070 तक नेट-ज़ीरो कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सरकार सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन, जल विद्युत और परमाणु ऊर्जा जैसे स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों का विस्तार कर रही है। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि परमाणु ऊर्जा एक स्थिर और भरोसेमंद स्रोत है, क्योंकि इसका उत्पादन मौसम की परिस्थितियों पर निर्भर नहीं करता।
स्वदेशी एसएमआर तकनीक विकसित होने से भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता को भी मजबूती मिलेगी। विशेषज्ञों के अनुसार भविष्य में भारत इस तकनीक के निर्माण, अनुसंधान और निर्यात के क्षेत्र में भी वैश्विक भूमिका निभा सकता है। छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों का उपयोग औद्योगिक क्षेत्रों, दूरस्थ इलाकों, डेटा सेंटरों और हरित हाइड्रोजन उत्पादन जैसी परियोजनाओं में भी किया जा सकता है।
सरकार का कहना है कि सभी परियोजनाओं में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय परमाणु सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन किया जाएगा। पर्यावरणीय प्रभावों का मूल्यांकन, नियामकीय स्वीकृतियां और स्थानीय समुदायों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी। फिलहाल डिजाइन, अनुसंधान और तकनीकी परीक्षण का कार्य जारी है तथा निर्धारित समयसीमा के भीतर परियोजनाओं को पूरा करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह योजना तय समय पर पूरी होती है तो भारत स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में नई ऊंचाई हासिल करेगा। इससे देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी, आयातित जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होगी और भविष्य की हरित अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी। सरकार की यह पहल भारत को वैश्विक ग्रीन एनर्जी परिदृश्य में एक मजबूत और आत्मनिर्भर राष्ट्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।















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