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‘धुरंधर’ को प्रोपेगेंडा कहने वालों पर बरसे अनुपम खेर, बोले- 1000 करोड़ की सफलता ही सबसे बड़ा जवाब

मुंबई, महाराष्ट्र:

बॉलीवुड अभिनेता अनुपम खेर ने अपनी फिल्मों को ‘प्रोपेगेंडा’ कहे जाने वाले आरोपों पर खुलकर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि अब इस तरह की आलोचनाओं का उन पर कोई असर नहीं पड़ता और दर्शकों का समर्थन ही किसी फिल्म की सबसे बड़ी कसौटी होता है। हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में अभिनेता ने ‘द कश्मीर फाइल्स’ और ‘धुरंधर’ को लेकर उठे विवादों पर भी अपनी राय रखी।

अनुपम खेर ने कहा कि उनकी कई फिल्मों को रिलीज के समय ‘प्रोपेगेंडा’ कहकर निशाना बनाया गया, लेकिन दर्शकों ने उन फिल्मों को भरपूर प्यार दिया। उनका मानना है कि किसी भी फिल्म का मूल्यांकन दर्शकों की प्रतिक्रिया और उसकी कहानी के आधार पर होना चाहिए, न कि केवल राजनीतिक या वैचारिक नजरिए से।

‘धुरंधर’ को लेकर की गई आलोचनाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए अभिनेता ने कहा कि फिल्म को भी प्रोपेगेंडा बताया गया था, लेकिन इसकी जबरदस्त व्यावसायिक सफलता ने सभी आलोचनाओं का जवाब दे दिया। उन्होंने कहा कि यदि कोई फिल्म दर्शकों के बीच व्यापक स्वीकार्यता हासिल करती है, तो वही उसकी सबसे बड़ी उपलब्धि होती है। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि फिल्म की कथित 1,000 करोड़ रुपये की कमाई उसके आलोचकों के लिए “1,000 करोड़ का थप्पड़” साबित हुई।

अनुपम खेर ने यह भी कहा कि वह अब इस बात की चिंता नहीं करते कि लोग उनकी फिल्मों को किस नजरिए से देखते हैं। उनके अनुसार, एक कलाकार का काम ईमानदारी से अपनी भूमिका निभाना है और अंतिम फैसला हमेशा दर्शकों के हाथ में होता है। उन्होंने कहा कि समय के साथ उन्होंने आलोचनाओं को स्वीकार करना सीख लिया है और अब वे केवल अपने काम पर ध्यान देते हैं।

अभिनेता ने अपनी आगामी फिल्मों का भी जिक्र किया और बताया कि वह भविष्य में भी अलग-अलग विषयों पर आधारित फिल्मों में काम करते रहेंगे। उनका कहना था कि सिनेमा समाज के विभिन्न पहलुओं को सामने लाने का माध्यम है और हर फिल्म को दर्शकों के सामने अपनी बात रखने का अधिकार है।

गौरतलब है कि ‘द कश्मीर फाइल्स’ की रिलीज के दौरान भी फिल्म को लेकर देशभर में तीखी बहस देखने को मिली थी। एक पक्ष ने इसे वास्तविक घटनाओं पर आधारित फिल्म बताया, जबकि दूसरे पक्ष ने इसे प्रोपेगेंडा करार दिया था। अब ‘धुरंधर’ को लेकर भी इसी तरह की चर्चाएं सामने आई हैं।

फिल्म विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी फिल्म को लेकर अलग-अलग विचार होना स्वाभाविक है। किसी फिल्म की सफलता या उसके संदेश को लेकर दर्शकों और समीक्षकों की राय अलग हो सकती है। ऐसे में अंतिम निर्णय दर्शकों की पसंद, फिल्म की गुणवत्ता और उसके प्रदर्शन पर ही निर्भर करता है।

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