तमिलनाडु में हाल ही में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है जब राज्य सरकार ने राज्य चुनाव आयुक्त जोथी निर्मलासामी से इस्तीफा देने का अनुरोध किया है। निर्मलासामी ने मार्च 2024 में इस पद का कार्यभार संभाला था और उनकी सेवा अवधि मई 2029 तक निर्धारित थी।
जोथी निर्मलासामी का कार्यकाल पांच वर्षों का होता है, जिसमें उन्हें राज्य के चुनाव प्रणाली के संचालन और निष्पक्षता की गारंटी देनी होती है। उनके पदभार ग्रहण करने के बाद से तमिलनाडु में कई चुनावी गतिविधियाँ संपन्न हुई हैं और चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शिता एवं निष्पक्षता के साथ पूरा करने का प्रयास किया गया है।
हालांकि, राज्य सरकार की तरफ से उन्हें इस्तीफा देने का जो निर्देश आया है, उसके पीछे की राजनीतिक पृष्ठभूमि और कारण फिलहाल सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम सरकार और चुनाव आयोग के बीच मतभेदों या व्यावहारिक असहमति का परिणाम हो सकता है।
राज्य प्रशासकीय सूत्रों के अनुसार, चुनाव आयोग के निर्णय और कार्रवाईयों की समीक्षा के दौरान कुछ गरमाहट देखने को मिली है, जिसके कारण स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। राज्य सरकार ने इस्तीफे का अनुरोध करके आगामी चुनावों में सुचारू संचालन के लिए नई रणनीति अपनाने का संकेत दिया है।
निर्मलासामी द्वारा इस पद पर आना तमिलनाडु की चुनाव प्रणाली का एक महत्वपूर्ण चरण था, क्योंकि उनकी नियुक्ति के बाद से चुनाव प्रक्रियाओं में क्रियान्वयन और निगरानी के लिए कई कदम उठाए गए थे ताकि चुनाव अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बन सके। अब यह देखना बाकी है कि उनके इस्तीफे के बाद इस पद पर किसे नियुक्त किया जाएगा और इसका तमिलनाडु की राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
राज्य सरकार और चुनाव आयुक्त कार्यालय दोनों ने अभी तक इस मामले पर आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन राजनीतिक दलों और विशेषज्ञों की नजरें इस घटनाक्रम पर बनी हुई हैं। आगामी दिनों में इस संबंध में और जानकारी सामने आने की संभावना है।














