Education

सेंट्रल संस्कृत यूनिवर्सिटी ने शुरू किया एआई और डेटा साइंस में बी.टेक कार्यक्रम

Central Sanskrit University introduces B.Tech programme in AI, data science

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने “मन की बात” कार्यक्रम के दौरान एक महत्वपूर्ण घोषणा की है, जिसमें उन्होंने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के क्षेत्र में नई पहल की जाएगी ताकि भारतीय भाषाओं के लिए नए उपकरण विकसित किए जा सकें और प्राचीन ग्रंथों के डिजिटलीकरण को तेज़ किया जा सके। यह कदम देश की सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस पहल से भारतीय भाषाओं का संरक्षण होगा और साथ ही हिंदी, संस्कृत समेत अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में तकनीकी विकास को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने बताया कि इसके तहत भारत में नई तकनीक विकसित की जाएगी जो देश की संस्कृति, ज्ञान और भाषा को डिजिटल युग में सशक्त बनाएगी।

इस संबंध में, सेंट्रल संस्कृत यूनिवर्सिटी ने बी.टेक कार्यक्रम शुरू किया है, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा साइंस पर केंद्रित है। यह कार्यक्रम खासतौर पर उन छात्र-छात्राओं के लिए है जो भारतीय भाषाओं में तकनीकी शोध और विकास करना चाहते हैं। विश्वविद्यालय के अधिकारियों का कहना है कि यह कोर्स व्यावहारिक और सैद्धांतिक दोनों दृष्टिकोण से मजबूत होगा और विद्यार्थियों को भविष्य की तकनीकी चुनौतियों के लिए तैयार करेगा।

मनोनीत शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल तकनीक के माध्यम से प्राचीन संस्कृत ग्रंथों को संरक्षण मिलेगा और युवाओं को उनकी विरासत से जोड़ने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही नई पीढ़ी तकनीकी कौशल अर्जित कर भारतीय भाषाओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर व्यापक रूप से फैलाने में सहयोग दे सकेगी।

इसके अतिरिक्त, योजना के तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल भाषा अनुवाद, पाठ पहचान और ज्ञान संग्रह जैसे कई क्षेत्रों में किया जाएगा। इससे विभिन्न भाषाओं के बीच संवाद आसान होगा और ज्ञान के आदान-प्रदान में गति आएगी।

विशेषज्ञों ने बताया कि इस दिशा में सरकार की यह पहल भारत को वैश्विक तकनीकी मानचित्र पर एक महत्वपूर्ण स्थान दिलाएगी और साथ ही रोजगार के अवसर भी बढ़ाएगी। डिजिटल इंडिया के विजन को साकार करने में यह एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

इस पहल से भारत में तकनीकी शिक्षा का स्वरूप भी बदलेगा और युवाओं को नई तकनीकों से लैस करने में मदद मिलेगी। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि युवा देश के भविष्य हैं और उन्हें इस तरह के आधुनिक कौशलों में प्रशिक्षित करना आवश्यक है ताकि भारत तकनीकी क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सके।

सेंट्रल संस्कृत यूनिवर्सिटी ने भी इस अवसर पर कहा कि उनका उद्देश्य विज्ञान और संस्कृति को साथ लेकर चलना है ताकि भारत की सांस्कृतिक धरोहर और तकनीकी प्रगति दोनों हाथों में हाथ डालकर आगे बढ़ सकें।

इस नई पहल को देखकर उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले समय में भारतीय भाषाओं के लिए बने नए एआई उपकरण न केवल शिक्षा और अनुसंधान को बढ़ावा देंगे, बल्कि सांस्कृतिक संरक्षण के साथ-साथ तकनीकी विकास में भी नया आयाम स्थापित करेंगे।

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