कोलकाता: वरिष्ठ तृणमूल कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री आरूप बिस्वास को कोलकाता उच्च न्यायालय ने मेसी इवेंट विवाद में जबरदस्ती कार्रवाई से राहत दी है। इस मामले में उन्हें पुलिस के सामने पेश होने और अपना पासपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया था, लेकिन कोर्ट ने उनके पक्ष में राहत प्रदान करते हुए मामले की तह तक जाने की बात कही।
पूर्व मंत्री आरूप बिस्वास को हाल ही में एक फुटबॉल आयोजन में हुए विवाद के सिलसिले में पुलिस जांच के लिए बुलाया गया था। पुलिस ने उनसे पूछताछ के लिए हाजिर होने और मुख्य साक्ष्य के तौर पर पासपोर्ट कोर्ट में जमा करने को कहा था। हालांकि, इस मामले में उनका पक्ष मजबूती से सामने आया और न्यायालय ने पुलिस की कार्यवाही पर फिलहाल रोक लगा दी।
कोर्ट की ओर से कहा गया है कि जांच प्रक्रिया को बाधित नहीं किया जाना चाहिए और किसी भी पक्ष के खिलाफ कार्रवाई करने से पहले सारे तथ्य ध्यानपूर्वक जांचे जाएं। वरिष्ठ विधिवेत्ता द्वारा दायर याचिका की सुनवाई के बाद, न्यायालय ने इस बात पर जोर दिया कि नेताओं के साथ-साथ आम नागरिकों के अधिकारों की रक्षा भी आवश्यक है।
पुलिस द्वारा जारी नोटिस के बाद आरूप बिस्वास ने कहा था कि वे जांच में पूरी तरह से सहयोग करेंगे और कानून के दायरे में रहकर ही काम करेंगे। उन्होंने अपनी निष्पक्षता पर जोर दिया और कहा, “कानून सबके लिए बराबर है और मैं पूरी तरह से अपनी पार्टी और जनता के विश्वास के मुताबिक इस मामले का सामना करूंगा।”
राजनीतिक पंडितों का मानना है कि इस फैसले से तृणमूल कांग्रेस को राजनीतिक तौर पर कुछ राहत मिली है क्योंकि यह मामला उनकी छवि को प्रभावित कर रहा था। वहीं, विपक्षी दल इस मामले की न्यायिक परीक्षा को लेकर सतर्क हैं।
फुटबॉल के मेसी इवेंट आयोजन में हुई अनियमितताओं का आरोप पहली बार उभर कर सामने आया था जब कुछ कथित गड़बड़ी की खबरें मीडिया में आईं। इसके बाद पुलिस जांच शुरू हुई और मामले में कई दावेदारों ने अपनी अपनी बात रखनी शुरू की।
कोलकाता हाई कोर्ट के इस निर्णय के बाद अब आने वाले दिनों में मामले की गंभीरता से जांच होने की उम्मीद जताई जा रही है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच न्यायिक निष्पक्षता के साथ पूरी होगी और किसी को भी किसी भी रूप में बुरी तरह प्रभावित नहीं किया जाएगा।
अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी तरह से कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए होगी और मामले में किसी भी तरह की जल्दबाजी नहीं की जाएगी। आरूप बिस्वास समेत अन्य संबंधित पक्षों को भी उचित मौका दिया जाएगा।
यह फैसला पश्चिम बंगाल के राजनीतिक माहौल में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है, जहां चुनाव और राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच कानूनी और प्रशासनिक फैसलों पर गहरी नजर रहती है।
इस घटना से जुड़ी ताजा जानकारी आने पर संबंधित विभाग और पक्षों की प्रतिक्रिया से नई गुत्थियाँ भी सुलझ सकती हैं। इस दिशा में न्यायालय की निगरानी और कड़ी नजर में मामला आगे बढ़ेगा।















