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चुनावों के बाद ही उनकी चेतना क्यों जागी?: टीएमसी के घोष ने असंतुष्टों पर उठाए सवाल

'Why did their conscious wake up only after elections?': TMC's Ghosh on dissenters

कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के विधायक कुनाल घोष ने हालिया राज्य चुनावों के बाद पार्टी के कुछ नेताओं और विधायकों की आलोचना की है, जो कथित रूप से पार्टी छोड़ने पर विचार कर रहे हैं। घोष ने इन असंतुष्टों के उद्देश्य और समय पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

कुनाल घोष ने अपने बयान में कहा कि पार्टी और उसके नेतृत्व के प्रति अचानक असंतोष जताने वाले नेताओं ने पहले भी पार्टी के कई फायदे उठाए हैं। उन्होंने कहा, “चुनाव के बाद ही उनकी चेतना कैसे जागी? क्या ये सच्चे हैं या कुछ छिपे हुए एजेन्डे लेकर चल रहे हैं?”

टीएमसी विधायक ने अपनी बात जारी रखते हुए कहा कि इस तरह के कदम न केवल पार्टी के लिए बल्कि उसके कार्यकर्ताओं और समर्थकों के लिए भी हानिकारक हैं। उनकी मंशा पार्टी नेतृत्व को चुनौती देने की लगती है, जो कतई स्वीकार्य नहीं है।

कुनाल घोष ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस एक मजबूत नेतृत्व वाली पार्टी है, जिसने पिछले साल कई चुनौतियों का सामना करते हुए भी जनता के बीच अपनी पकड़ मजबूत की है। उन्होंने उन नेताओं को चेताया है जो बिना सोचे समझे पार्टी छोड़ने की योजना बना रहे हैं, कि वे अपने कदमों का पुनर्विचार करें।

टीएमसी के कुछ वरिष्ठ नेताओं के मुताबिक, पिछले चुनावों में मिली सफलता के बाद पार्टी में असंतोष जाहिर करने वाले कुछ नेता अपनी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं। जबकि पार्टी संगठन को मजबूत बनाना और पार्टी की जीत को बनाए रखना सभी का साझा लक्ष्य होना चाहिए।

विश्लेषकों के अनुसार, पार्टी के अंदर इस तरह की चंचलता सामान्य राजनीतिक घटनाक्रमों का हिस्सा हो सकती है, लेकिन यह जरूरी है कि नेतृत्व ऐसे तत्वों को नियंत्रित करे और पार्टी को एकजुट बनाए रखे।

कुल मिलाकर, कुनाल घोष के बयान ने टीएमसी के भीतर बढ़ते मतभेदों को उजागर किया है, जिसने राजनीतिक गलियारों में काफी चर्चा को جنم दिया है। अब देखना यह होगा कि पार्टी नेतृत्व इस चुनौती का सामना कैसे करता है ताकि आगामी चुनावों में कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े।

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