मुंबई: स्कैंडिनेवियाई एयरलाइन SAS (स्कैंडिनेवियन एयरलाइंस) की भारतीय बाजार में वापसी की शुरुआत उम्मीदों के विपरीत रही। करीब 17 वर्षों के बाद कोपेनहेगन-मुंबई रूट पर शुरू की गई पहली वाणिज्यिक उड़ान को आवश्यक नियामकीय मंजूरी नहीं मिलने के कारण बीच रास्ते से वापस लौटना पड़ा।
एयरलाइन की फ्लाइट SK969 मंगलवार रात को डेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगन से मुंबई के लिए रवाना हुई थी। उड़ान ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, एयरबस A330 विमान लगभग चार घंटे तक उड़ान भरने के बाद अजरबैजान के हवाई क्षेत्र में पहुंचा, जहां से उसे वापस कोपेनहेगन लौटने का निर्देश दिया गया।
SAS ने आधिकारिक बयान में कहा कि भारत के लिए सेवा पुनः शुरू करने की दिशा में कई महीनों से तैयारी चल रही थी और सभी आवश्यक परिचालन व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई थीं। कंपनी को भरोसा था कि शेष औपचारिक मंजूरियां भी समय रहते प्राप्त हो जाएंगी। हालांकि अंतिम स्वीकृति जारी नहीं होने के कारण उड़ान संचालन जारी रखना संभव नहीं रहा।
एविएशन उद्योग के जानकारों के अनुसार, किसी भी अंतरराष्ट्रीय मार्ग पर उड़ान शुरू करने के लिए विभिन्न देशों की विमानन एजेंसियों, एयर ट्रैफिक प्राधिकरणों और नियामक संस्थाओं से कई स्तरों पर अनुमति लेनी होती है। इनमें परिचालन स्वीकृति, स्लॉट आवंटन, सुरक्षा अनुपालन और प्रशासनिक मंजूरियां शामिल रहती हैं।
SAS की भारत वापसी को यूरोप और भारत के बीच बढ़ती यात्रा मांग को देखते हुए एक रणनीतिक कदम माना जा रहा था। महामारी के बाद अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रा में तेजी आने से एयरलाइंस नए और पुराने मार्गों पर विस्तार कर रही हैं। ऐसे में भारत जैसे बड़े बाजार में SAS की पुनः एंट्री को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
एयरलाइन ने प्रभावित यात्रियों को सहायता उपलब्ध कराने और वैकल्पिक यात्रा व्यवस्था सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया है। कंपनी ने कहा कि यात्रियों, कर्मचारियों और संचालन की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा किसी भी प्रकार की नियामकीय अनिश्चितता के बीच उड़ान संचालन नहीं किया जाएगा।
फिलहाल SAS संबंधित अधिकारियों के साथ संपर्क में है और लंबित मंजूरियां प्राप्त करने का प्रयास कर रही है। कंपनी को उम्मीद है कि सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद अगले कुछ दिनों में कोपेनहेगन-मुंबई सेवा नियमित रूप से शुरू हो सकेगी।
विमानन क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि यह एक अस्थायी प्रशासनिक बाधा है, लेकिन इससे यह भी स्पष्ट होता है कि अंतरराष्ट्रीय विमानन संचालन में नियामकीय प्रक्रियाओं का महत्व कितना अधिक है। भारत में SAS की वापसी पर उद्योग की नजर बनी हुई है।















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