भारत के तेजस्विन शंकर ने एथलेटिक्स के क्षेत्र में एक नई मिसाल कायम की है। 27 वर्षीय तेजस्विन शंकर ने डेकाथलन में 8,000 अंक की बाधा पार कर पहली बार देश का नाम इस क्षेत्र में गौरवान्वित किया है। यह उपलब्धि न केवल उनके करियर की बड़ी सफलता मानी जा रही है, बल्कि भारतीय एथलेटिक्स के लिए भी प्रेरणादायक साबित हो रही है।
तेजस्विन की यह कड़ी मेहनत और निरंतर समर्पण का परिणाम है कि वे न केवल डेकाथलन में बल्कि अन्य कई खेलों में भी अपनी पकड़ बनाने के लिए कदम बढ़ा रहे हैं। उन्होंने ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में कई इवेंट्स में हिस्सा लेने की योजना भी बनाई है। इससे उनके खेल के अनुभव में और भी वृद्धि होगी और वे विभिन्न क्षेत्रों में अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन कर सकेंगे।
तेजस्विन ने अपने करियर की शुरुआत एक विशिष्ट खिलाड़ी के रूप में की थी, लेकिन उनकी मेहनत, अनुशासन और खेल के प्रति लगन ने उन्हें विशेष बनाया है। उन्होंने देश के लिए कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया है और अपने प्रदर्शन से हर बार दर्शकों और विशेषज्ञों को प्रभावित किया है।
डेकाथलन एक ऐसा खेल है जिसमें धावन, कूद, थ्रो समेत कई विभिन्न प्रकार के इवेंट्स शामिल होते हैं। इस खेल में 8,000 अंक पार करना किसी साधारण खिलाड़ी के लिए आसान नहीं होता। तेजस्विन की इस उपलब्धि ने देश में एथलेटिक्स के प्रति जागरूकता बढ़ाई है और युवाओं को भी इस क्षेत्र में उतरने के लिए प्रोत्साहन दिया है।
तेजस्विन ने मीडिया से बातचीत में कहा है कि वे अपने प्रदर्शन में लगातार सुधार करना चाहते हैं और ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स का मौका उनके लिए खुद को साबित करने का एक सुनहरा अवसर होगा। वे भविष्य में ओलंपिक जैसे बड़े मंचों पर भी भारत का प्रतिनिधित्व करने का इच्छुक हैं।
उनकी इस उपलब्धि से यह स्पष्ट होता है कि भारतीय खेल के भविष्य में ऐसे युवा खिलाड़ी ही देश का नाम रोशन करेंगे। सरकार और खेल संगठनों द्वारा ऐसे खिलाड़ियों को समर्थन मिलना चाहिए ताकि वे और अधिक ऊंचाइयों को छू सकें। तेजस्विन शंकर के संघर्ष और सफलता की कहानी सभी खिलाड़ियों के लिए प्रेरणादायक है।














