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दक्षिणी राज्यों में मधुमेह का प्रकोप बढ़ता जा रहा है: एनएफएचएस रिपोर्ट

Prevalence of diabetes continues to climb in southern States: NFHS

नई दिल्ली। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 (NFHS-6) के ताजा आंकड़े बताते हैं कि आंध्र प्रदेश, केरल और तमिलनाडु में अधिक वजन और मोटापे की समस्या तेजी से बढ़ रही है। ये दक्षिणी राज्य अब उन क्षेत्रों में शुमार हो गए हैं जहाँ वयस्कों में मोटापे और अधिक वजन की दर सर्वाधिक देखी गई है।

सर्वेक्षण के परिणामों के अनुसार, इन राज्यों में मधुमेह की प्रवृत्ति भी बढ़ी है, जो चिंता का विषय है। अधिक वजन और मोटापे के कारण मधुमेह, उच्च रक्तचाप तथा हृदय रोग जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि जीवनशैली में बदलाव, अस्वास्थ्यकर भोजन, शारीरिक गतिविधियों की कमी इस बढ़ती समस्या के मुख्य कारण हैं।

आंध्र प्रदेश में मोटापे की दर पिछले कुछ वर्षों में 15% से बढ़कर लगभग 25% हो गई है। केरल में यह आंकड़ा और भी अधिक दिख रहा है, जहाँ लगभग 30% वयस्क अधिक वजन या मोटापे से ग्रसित हैं। तमिलनाडु में भी समान परिस्थिति देखने को मिल रही है।

एनएफएचएस-6 की रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि ये राज्य स्वास्थ्य सेवाओं और जागरूकता अभियानों के माध्यम से इस चुनौती का सामना करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अभी और व्यापक प्रयासों की आवश्यकता है। विशेषज्ञ राय है कि स्थानीय स्तर पर पोषण शिक्षा, व्यायाम को बढ़ावा देना और स्वस्थ आहार अपनाना आवश्यक होगा।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति में इस दिशा में सुधार के लिए नवीन पहल की जा रही हैं ताकि मोटापे और मधुमेह जैसी गैर-संचारी बीमारियों को रोकने में मदद मिल सके। सरकार को चाहिए कि वह इन राज्यों में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को मजबूत करे और सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों को और प्रभावी बनाए।

विशेषज्ञों ने जनता से भी आग्रह किया है कि वे स्वयं अपनी जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव लाएं, क्योंकि स्वास्थ्य संबंधी ये चुनौतियां अकेले सरकार के प्रयासों से नहीं सुलझ सकतीं। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच आवश्यक हैं।

मोटापे और मधुमेह के बढ़ते मामलों से निपटना स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है, खासकर उन राज्यों में जहाँ सामाजिक आर्थिक परिस्थितियां इसे और जटिल बनाती हैं। इसके लिए समन्वित रणनीति की जरूरत है जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य व्यवस्था और सामाजिक भागीदारी शामिल हो।

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