मुंबई: भारत में आम को फलों का राजा कहा जाता है, और इसमें अल्फांसो आम की लोकप्रियता और प्रशंसा अद्वितीय है। पश्चिमी भारत के महाराष्ट्र और गोवा के तटीय इलाकों में उगाए जाने वाले इस आम की खुशबू, स्वाद और रंग की विशिष्टता इसे देश-विदेश में एक विशिष्ट पहचान दिलाती है। लेकिन हाल के वर्षों में इस राजा की स्थिति को गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
अल्फांसो आम के उत्पादन और निर्यात में गिरावट ने किसानों, व्यापारियों और निर्यातक उद्योग को चिंतित कर दिया है। प्रमुख कारणों में जलवायु परिवर्तन, अतिवृष्टि, कीट संक्रमण, और कोविड-19 महामारी के दौरान वितरण और निर्यात में समस्याएं शामिल हैं। इस अवधि में कई किसान आर्थिक रूप से प्रभावित हुए हैं, जिससे क्षेत्रीय स्तर पर आम की पैदावार में कमी आई है।
विशेषज्ञों और कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि अल्फांसो आम की खेती में नयी तकनीकी विधियों को अपनाना, जल प्रबंधन और कीट नियंत्रण के लिए बेहतर उपाय आवश्यक हैं। इसके साथ ही, किसानों और निर्यातकों को सरकारी सहायता और वित्तीय प्रोत्साहन मिलना चाहिए ताकि वे ऐसी चुनौतियों से बेहतर तरीके से निपट सकें।
सरकारी एजेंसियां भी इस समस्या को गंभीरता से ले रही हैं और किसानों को सटीक मौसम पूर्वानुमान, बेहतर बीज और कृषि उपकरण उपलब्ध कराने की दिशा में कार्यरत हैं। साथ ही निर्यात बाजारों में भारत की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति को मजबूत करने के लिए नीतिगत प्रयास भी बढ़ाए गए हैं।
अल्फांसो आम केवल एक फल से अधिक है; यह किसानों की आजीविका और भारत के सांस्कृतिक पहचान का एक हिस्सा है। इसलिए, इसके संरक्षण और संवर्धन के लिए संयुक्त प्रयासों की आवश्यकता है। यदि सही कदम उठाए गए तो यह संकट जल्द ही दूर किया जा सकता है और “फल का राजा” फिर से अपनी चमक और लोकप्रियता हासिल कर सकता है।
आम प्रेमियों और उद्योग जगत दोनों के लिए यह उम्मीद की किरण है कि आने वाले वर्षों में अल्फांसो आम अपने स्वाद और गुणवत्ता से विश्वभर में अपना वर्चस्व कायम रखेगा।













