नए राजपत्र में बदले नियम से प्रधान पाठको में आक्रोश
छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा सेवा भर्ती एवम पदोन्नति नियम 2019 में संशोधन कर प्रकाशित नए राजपत्र को लागू करने पर प्रधान पाठको ने गहरी असंतोष और आक्रोश व्यक्त किया है।छत्तीसगढ़ हेडमास्टर फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष कमलेश सिंह बिसेन ने वक्तव्य जारी कर राजपत्र में संशोधित किए अनेक बिंदुओ पर नाराजगी जाहिर की है।प्रदेश अध्यक्ष ने बताया की यह संशोधन प्रदेश के बड़े शिक्षक वर्ग के हितों पर कुठाराधात है,तथा वर्ग विशेष को लाभ पहुंचाने की दृष्टि से लाया गया है।प्रदेश का सबसे बड़ा शिक्षक समुदाय एल बी संवर्ग को पदनाम में एल बी हटाने से कोई लाभ नहीं होगा,उल्टे आगे पदोन्नति में बाधा उत्तपन्न होगी।राजपत्र में शिक्षक पद में भर्ती और पदोन्नति में विषय बंधन फिर से लागू किया गया है।जिसके कारण पूर्व से सेवारत कला,और वाणिज्य विषय वाले सहायक शिक्षक जो वरिष्ठ है पदोन्नति से वंचित रह जायेंगे।जबकि गणित, विज्ञान और अंग्रेजी विषय वाले कनिष्ठ सहायक शिक्षक पदोन्नत हो जायेंगे।इसी प्रकार संस्कृत विषय में संस्कृत स्नातक शिक्षक ही पदोन्नत होंगे जिनकी संख्या नगण्य है,जबकि संस्कृत में स्नातकोत्तर योग्यता धारी शिक्षक पदोन्नति से वंचित हो जायेंगे। एबीईओ पद में भर्ती और पदोन्नति के लिए 75%सीधी भर्ती और 25% मिडिल प्रधानपाठक से पदोन्नति का प्रावधान है जो तार्किक नही है।क्योंकि पूर्व में सीधी भर्ती और पदोन्नति के लिए 50% का प्रावधान रहता था।इस राजपत्र में संशोधन का सबसे अधिक दुष्प्रभाव पदोन्नत प्राथमिक और माध्यमिक प्रधान पाठको को होगा।क्योंकि पूर्व में शिक्षक और प्रधानपाठक का पृथक पृथक वरिष्ठता सूची बनाकर पदोन्नति में अनुपात अनुसार पदोन्नति देने का प्रावधान था।जिसे बदलकर समेकित सूची बनाकर बिना अनुपात के पदोन्नति देने का फैसला लिया गया है।यह नियम लागू हो गया तो एल बी संवर्ग के पदोन्नत प्राथमिक और माध्यमिक प्रधान पाठको को आजीवन पदोन्नति संभव नहीं है।क्योंकि पदोन्नति तिथि से वरिष्ठता गणना होने पर आगामी पदोन्नति में शिक्षक और व्याख्याता वर्ग वरिष्ठ हो जायेंगे।प्रदेश अध्यक्ष कमलेश सिंह बिसेन ने उक्त सभी बिंदुओ पर विभाग से स्पष्टीकरण मांगते हुवे निवेदन किया है की किसी भी वर्ग को नुकसान पहुंचाए बिना सबके हित के लिए राजपत्र में उचित बदलाव किया जाए।यदि ऐसा नहीं किया जाता तो संगठन द्वारा भविष्य में समान विचारधारा के संगठनों को साथ लेकर उग्र आंदोलन किया जाएगा।
प्रधान पाठको ने किया VSK APP का बहिष्कार
शिक्षा विभाग में ऑनलाइन अटेंडेंस के लिए जारी VSK एप का विरोध कर बहिष्कार करने का ज्ञापन जिला शिक्षा अधिकारी बेमेतरा को दिया।जिला शिक्षा अधिकारी बेमेतरा को ज्ञापन देकर शिक्षा मंत्री और शिक्षा सचिव को ऑनलाइन उपस्थिति एप के संबंध में बताया गया है कि इस एप को डाउनलोड करने पर लोकेशन,गैलरी,वीडियो की अनुमति मांगी जाती है।यह एप चुकी शिक्षको की निजी मोबाइल में उपयोग किया जाएगा।जिसमे शिक्षको की निजी जानकारी ,बैंक डिटेल,आधार,और पैन कार्ड जैसी जानकारियां सुरक्षित रहती है।एप के प्रयोग से निजता का उल्लंघन और सायबर फ्राड भी संभावित है।किसी शिक्षक की निजी जानकारी सार्वजनिक हो जाती है या वित्तीय धोखाधड़ी हो जाती है तो इसका जवाबदार कौन होगा ? प्रधान पाठको का यह भी कहना है की मोबाइल शिक्षक की निजी संपत्ति है, इसको खरीदने,रिचार्ज कराने का खर्च शिक्षक स्वयं वहन करते है।निजी संपत्ति का कैसे प्रयोग करना है शिक्षक का विशेषाधिकार है।परंतु निजी मोबाइल में सरकारी एप का उपयोग कराना और दबाव डालना अनुचित है।प्रधान पाठको का कहना है की हम शासन की मंशा का विरोध नही करते बल्कि ऑनलाइन अटेंडेंस करने को तैयार है बशर्ते विभाग इसके लिए बायोमेट्रिक डिवाइस और इंटरनेट सुविधा उपलब्ध कराए।अथवा शासन अपने खर्च से सभी शालाओं को मोबाइल फोन और प्रधानपाठक को इंटरनेट खर्च का भुगतान करे।आज के ज्ञापन कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ हेडमास्टर वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष कमलेश सिंह बिसेन,प्रदेश सचिव त्रिभुवन वैष्णव ,महिला मोर्चा प्रभारी किरण राजपुत,जिला सचिव चंद्रशेखर तिवारी,ब्लॉक अध्यक्ष अनिल जांगडे, बृजपाल डाहीरे स्वप्निल, मनोज पटेल,मुकेश शर्मा,संगीता भगत,लक्ष्मी छेदैहा,शेरसिंह राजपूत,रमेश तिवारी,बलदाऊ जायसवाल,गणेश देवांगन,आशा चंदेल,सहित बड़ी संख्या में शिक्षक और प्रधानपाठक शामिल रहे।संघ के प्रदेश अध्यक्ष कमलेश सिंह बिसेन ने बताया कि आज बेमेतरा सहित अनेक जिलों में हमारा ज्ञापन का कार्यक्रम हो रहा है।इसके बाद भी अगर विभाग नही चेती तो धरना ,प्रदर्शन भी किया जाएगा।प्रदेश के किसी शिक्षक को दबावपूर्वक एप डाउनलोड करने पर मजबूर नही होने देंगे।साथ ही सरकार से निवेदन भी किया शिक्षको की चिंताओं का निराकरण करते हुवे ऐसी व्यवस्था बनाई जाए जिससे विभाग में काम की गुणवत्ता और पारदर्शिता बढ़े।















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