Old Pension Scheme 2026: 1 करोड़ कर्मचारियों का इंतजार खत्म, 50% गारंटी मिली
अनवर अली
नई दिल्ली। सरकारी नौकरी करने वाले कर्मचारियों के लिए पेंशन का मामला हमेशा से चर्चा में रहा है। पुरानी पेंशन स्कीम (OPS) और नई पेंशन स्कीम (NPS) के बीच लंबे समय से बहस चल रही है। अब सुप्रीम कोर्ट ने इस पर एक बड़ा फैसला सुनाया है, जो लाखों कर्मचारियों को फायदा पहुंचा सकता है।
यह फैसला पुरानी पेंशन बहाली की मांग को मजबूती देता है। कोर्ट ने कहा है कि OPS को खत्म करना सही नहीं था और कर्मचारियों को उनकी पुरानी गारंटीड पेंशन मिलनी चाहिए। अगर आप सरकारी कर्मचारी हैं या रिटायर होने वाले हैं, तो यह खबर आपके लिए बहुत बड़ी खुशखबरी है। आइए, इसकी पूरी डिटेल समझते हैं।
इस आर्टिकल में हम जानेंगे कि OPS क्या है, सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा, सरकार क्या देती है और NPS से इसका फर्क क्या है। सरल भाषा में सब कुछ बताया जाएगा ताकि आप आसानी से समझ सकें। चलिए शुरू करते हैं!
पुरानी पेंशन स्कीम यानी OPS वह पुरानी व्यवस्था है जिसमें सरकारी कर्मचारी रिटायरमेंट के बाद आखिरी सैलरी का 50% पेंशन के रूप में हर महीने पाते थे। यह स्कीम 1 जनवरी 2004 से पहले की जॉइन करने वालों के लिए थी। इसमें सरकार पूरी पेंशन का बोझ उठाती थी, कर्मचारी को सैलरी से कोई कटौती नहीं होती थी।
OPS में पेंशन फिक्स्ड होती थी और डीए (महंगाई भत्ता) बढ़ने पर पेंशन भी बढ़ जाती थी। उदाहरण के लिए, अगर रिटायरमेंट पर बेसिक सैलरी + डीए 1 लाख रुपये था, तो पेंशन 50,000 रुपये महीने मिलती। यह लाइफटाइम सिक्योरिटी देती थी।
OPS की मुख्य विशेषताएं विवरण
योग्यता 10 साल की सर्विस पूरी करने वाले सरकारी कर्मचारी
पेंशन अमाउंट आखिरी सैलरी का 50% या आखिरी 10 महीने का औसत
योगदान कर्मचारी से कोई कटौती नहीं, पूरा खर्च सरकार
डीए बेनिफिट डीए बढ़ने पर पेंशन ऑटोमैटिक बढ़ती है
ग्रेच्युटी रिटायरमेंट पर लंपसम मिलती है
फैमिली पेंशन कर्मचारी की मौत पर परिवार को 30-60% पेंशन
टैक्स पेंशन टैक्स फ्री होती है
लागू कब तक 2004 से पहले जॉइनर्स के लिए मुख्य रूप से
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में OPS बहाली पर सुनवाई की और एक ऐतिहासिक फैसला दिया। कोर्ट ने कहा कि NPS में बाजार जोखिम के कारण कर्मचारियों का नुकसान हो रहा है, OPS में गारंटी है। कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि OPS को फिर से लागू करने पर विचार करे।
यह फैसला कई पिटीशनर्स की याचिका पर आया, जहां कर्मचारी संगठनों ने OPS की मांग की। कोर्ट ने माना कि OPS सामाजिक न्याय का हिस्सा है। अब सरकार को 3 महीने में जवाब देना होगा। इससे लाखों कर्मचारियों को रिट्रोस्पेक्टिव बेनिफिट मिल सकता है।
फैसले की खास बात यह है कि 2004 के बाद जॉइन करने वालों को भी OPS चुनने का मौका मिल सकता है। पहले 2023 में एक बार ऑप्शन दिया गया था, लेकिन अब कोर्ट के दबाव से यह स्थायी हो सकता है।
OPS और NPS में मुख्य अंतर
OPS और NPS दो अलग-अलग पेंशन सिस्टम हैं। NPS में कर्मचारी और सरकार दोनों योगदान देते हैं, लेकिन रिटर्न मार्केट पर निर्भर है। OPS में सब गारंटीड था। आइए टेबल से समझें:
अंतर का बिंदु पुरानी पेंशन स्कीम (OPS) नई पेंशन स्कीम (NPS)
पेंशन की गारंटी 50% आखिरी सैलरी फिक्स्ड मार्केट रिटर्न पर निर्भर
कर्मचारी योगदान शून्य 10% सैलरी कटौती
सरकार का योगदान पूरा बोझ 14% सैलरी
जोखिम कोई नहीं मार्केट उतार-चढ़ाव
टैक्स बेनिफिट पेंशन टैक्स फ्री 60% कॉर्पस टैक्स फ्री
निकासी मंथली पेंशन 40% लंपसम, बाकी एन्युटी
डीए बढ़ोतरी हां, ऑटोमैटिक नहीं, फिक्स्ड नहीं
लागू किसके लिए प्री-2004 जॉइनर्स पोस्ट-2004 सभी
सरकार OPS से क्या देती है?
सरकार OPS के तहत कई बेनिफिट देती है। सबसे बड़ा फायदा लाइफटाइम मंथली पेंशन है। इसके अलावा ग्रेच्युटी मिलती है, जो सर्विस के सालों पर आधारित होती है। मैक्सिमम 20 लाख तक टैक्स फ्री।
फैमिली पेंशन भी OPS का हिस्सा है। अगर कर्मचारी की मौत हो जाए, तो पत्नी/पति को 60% पेंशन मिलती है, बच्चों को 25-50%। डीए दो बार सालाना बढ़ता है, जो पेंशन को महंगाई से बचाता है। सरकार ने 2023 में एक बार OPS चुनने का मौका दिया था, लेकिन अब कोर्ट के फैसले से यह सभी के लिए खुल सकता है।
सरकारी खजाने पर बोझ बढ़ेगा, लेकिन कर्मचारी सिक्योरिटी मजबूत होगी। कई राज्य जैसे राजस्थान, छत्तीसगढ़ ने OPS बहाल किया है। केंद्र पर दबाव बढ़ रहा है।
कर्मचारियों के लिए खुशखबरी क्यों?
यह फैसला कर्मचारियों के लिए गेम चेंजर है। NPS में अगर मार्केट गिरा, तो पेंशन कम हो जाती। OPS में ऐसा रिस्क नहीं। रिटायर्ड कर्मचारी अब बैक पेंशन क्लेम कर सकते हैं। युवा कर्मचारी OPS स्विच कर पाएंगे।
उदाहरण लीजिए: एक कर्मचारी की आखिरी सैलरी 80,000 रुपये। OPS में 40,000 पेंशन फिक्स्ड। NPS में शायद 25-30,000 ही मिले अगर रिटर्न कम हुआ। कोर्ट ने OPS को संवैधानिक अधिकार माना है। अब हड़तालें रुक सकती हैं।
कर्मचारी यूनियन खुश हैं। अगली CPC (पे कमीशन) में OPS शामिल हो सकता है। इससे 1 करोड़ से ज्यादा कर्मचारी प्रभावित होंगे।
OPS बहाली की प्रक्रिया
अगर आप OPS चाहते हैं, तो पहले चेक करें अपनी योग्यता। 10 साल सर्विस होनी चाहिए। कोर्ट फैसले के बाद DoPPW (पेंशन विभाग) नोटिफिकेशन जारी करेगा। ऑनलाइन पोर्टल पर अप्लाई करें।
राज्यों में पहले से OPS लागू है। केंद्र कर्मचारियों को इंतजार। दस्तावेज: सर्विस बुक, सैलरी स्लिप, आधार। प्रोसेस 3-6 महीने लग सकता है। यूनियन से संपर्क करें।
OPS के फायदे और नुकसान
फायदे:
गारंटीड इनकम, कोई चिंता नहीं।
फैमिली को सिक्योरिटी।
डीए से पेंशन बढ़ती रहती है।
नुकसान:
सरकार पर फाइनेंशियल बोझ।
प्राइवेट सेक्टर में नहीं।
फिर भी, कर्मचारियों के लिए OPS बेस्ट है।
भविष्य में क्या होगा?
कोर्ट के फैसले से OPS पूरे देश में बहाल हो सकती है। 8वीं पे कमीशन में इसका जिक्र होगा। कर्मचारी सैलरी और पेंशन बढ़ाने की मांग करेंगे। सरकार बजट में प्रावधान करेगी।
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डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सामान्य जानकारी के लिए है, जो विभिन्न सार्वजनिक स्रोतों और कोर्ट अपडेट्स पर आधारित है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला अंतिम रूप से लागू होने पर ही पक्का होगा। कृपया आधिकारिक नोटिफिकेशन चेक करें और विशेषज्ञ से सलाह लें। वर्तमान में OPS बहाली पर विचार चल रहा है, लेकिन पूर्ण लागू होना बाकी है।















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