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कैंसर से एक दशक में 70 लाख जीवन बचाए जा सकेंगे, बशर्ते कि…

कोलंबिया में राष्ट्रीय कैंसर संस्थान में एक बॉयोलोजिस्ट से प्रशिक्षण हासिल करते हुए एक शोध सहायक.

स्वास्थ्य 05 फ़रवरी 2020
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने आगाह किया है कि अगर निम्न व मध्यम आय वाले देशों में कैंसर की रोकथाम और उसके इलाज के लिए और ज़्यादा उपाय नहीं किए गए तो इन देशों में अगले 20 वर्षों के दौरान कैंसर के मामलों में 60 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हो सकती है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मंगलवार, 4 फ़रवरी को विश्व कैंसर दिवस के मौक़े पर कहा है कि निम्न और मध्यम आय वाले देशों की कुल संख्या में से केवल 15 प्रतिशत ही सार्वजनिक सेवाओं के माध्यम से कैंसर के इलाज की समुचित सेवाएँ मुहैया कराते हैं.
जबकि धनी देशों की कुल संख्या के लगभग 90 फ़ीसदी देश अपने यहाँ कैंसर के इलाज की समुचित सुविधाएँ उपलब्ध कराते हैं.
विश्व कैंसर दिवस के मौक़े पर यूएन स्वास्थ्य एजेंसी और उसकी विशिष्ट अंतरराषट्रीय कैंसर शोध एजेंसी (आईएआरसी) ने दो रिपोर्टें जारी की हैं. इनमें से एक रिपोर्ट में कैंसर पर वैश्विक एजेंडा तय किया गया है और दूसरी रिपोर्ट में शोध व रोकथाम पर ध्यान केंद्रित किया गया है.
विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक टैड्रोस एडहैनॉम घेबरेयेसस का कहना है, “हर देश की परिस्थितियों के अनुरूप सर्वश्रेष्ठ वैज्ञानिक तरीक़े की शिनाख़्त करके अगले एक दशक के दौरान ही कम से कम 70 लाख लोगों का जीवन बचाया जा सकेगा.”
“कैंसर के इलाज के लिए तैयार की जाने वाली प्रणाली सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज पर आधारित होनी चाहिए और साथ ही तमाम संबंद्ध पक्षकारों को एकजुट होकर काम करने के लिए प्रेरित करना होगा.”
कैंसर ‘मृत्युदंड’ नहीं होना चाहिए
इन रिपोर्टों में बताया गया है कि अनेक क़दम उठाकर केंसर की रोकथाम में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की जा सकती है.
इनमें तंबाकू सेवन पर क़ाबू पाना भी शामिल है. कैंसर के कारण होने वाली मौतों में से लगभग एक चौथाई यानी लगभग 25 प्रतिशत तंबाकू सेवन की वजह से होती हैं.
साथ ही लिवर कैंसर की रोकथाम के लिए हैपेटाइटिस-बी का टीका लगाकर अच्छी कामयाबी हासिल की जा सकती है.
एचपीवी को रोकने वाला टीका लगाकर सर्वाइकल कैंसर को होने से रोकने में मदद मिल सकती है.
विश्व स्वास्थ्य संगठन में सहायक महानिदेशक और यूनिवर्सल हैल्थ कवरेज की निगरानी करने वाले डॉक्टर रेन मिन्गुई का कहना है, “ये हम सभी के लिए सतर्क करने वाला एक अवसर है जिसमें हमें कैंसर की रोकथाम व इलाज वाली सुविधाओं के मामलों में धनी व ग़रीब देशों के बीच के अंतर को दूर करना होगा.”
“अगर लोगों को प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाएँ हासिल होंगी और बीमारी का पता लगने पर आगे का इलाज कराने के लिए उन्हें सक्षम स्वास्थ्य सेवाओं में भेजने की भी व्यवस्था होगी तो कैंसर का शुरूआती स्तर पर ही पता लगाने में मदद मिलेगी, उसका सही समय पर सटीक इलाज किया जा सकेगा और अंततः कैंसर से छुटकारा पाने में मदद मिलेगी.”
उनका कहना था, “कैंसर किसी भी स्थान पर किसी भी व्यक्ति के लिए कोई मृत्युदंड नहीं होना चाहिए.”
बेहतर इलाज से जीवन बचते हैं
रिपोर्टों में कहा गया है कि कैंसर की रोकथाम व इलाज की दिशा में प्रगति तो हासिल की जा सकती है मगर अनेक देशों को अपने यहाँ कैंसर का इलाज सुनिश्चित करने के लिए उस पर आने वाली लागत, उसकी उपलब्धता व प्रभावशीलता को भी ध्यान में रखना होगा.
आईएआरसी की निदेशक डॉक्टर एलिज़ाबेट वीडरपास का कहना है कि पिछले पाँच दशकों के दौरान कैंसर पर शोध के क्षेत्र में बहुत अच्छी प्रगति हुई है, जिससे इस बीमारी के कारण होने वाली मौतें कम करने में मदद मिली है.
उनका कहना था, “उच्च आमदनी वाले देशों में कैंसर की रोकथाम, कैंसर का शुरूआती स्तर पर ही पता लगाने और उसकी जाँच व निगरानी करने के असरदार कार्यक्रम चलाए हैं. इनके साथ कैंसर का ठोस इलाज करने की सुविधा उपलब्ध होने से वर्ष 2000 से 2015 के बीच कैंसर के कारण शुरूआती स्तर पर मौतें होने के मामलों में 20 फ़ीसदी की कमी देखी गई है.”
“लेकिन निम्न व मध्य आय वाले देशों में केवल 5 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई. हम सभी देशों को समान रूप से लाभान्वित होते देखना चाहते हैं.”

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