नई दिल्ली। भारत में कॉमर्स शिक्षा एक महत्वपूर्ण और व्यापक क्षेत्र है, जो लाखों छात्रों को रोजगार की दिशा में मार्गदर्शन करती है। लेकिन 2024 में हुई एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, बी.कॉम के आधे से भी कम स्नातक रोजगार योग्य पाए गए हैं। यह स्थिति न केवल छात्रों के भविष्य के लिए चिंता का विषय है, बल्कि पूरे शिक्षा क्षेत्र और अर्थव्यवस्था के लिए भी सतर्क संकेत है।
कोरोना महामारी के बाद शिक्षा के स्वरूप में आए बड़े बदलावों के बावजूद, कॉमर्स के पाठ्यक्रम में अपेक्षित सुधार नहीं हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कॉमर्स शिक्षा आज भी अधिकांशतः शब्दकोश समझाने की प्रक्रिया पर आधारित है, जिसमें सिर्फ तथ्यों और परिभाषाओं को याद करना मुख्य होता है। जबकि वास्तविक दुनिया की अर्थव्यवस्था में विशेषज्ञता, व्यावहारिक ज्ञान और कौशलों की जरूरत होती है।
शैक्षणिक संस्थान अक्सर मात्र पाठ्यपुस्तक आधारित शिक्षा प्रदान करते हैं, जबकि व्यापार जगत में अकसर चुनौतीपूर्ण स्थिति, निर्णय लेने की क्षमता, संचार कौशल और टीम वर्क जैसी क्षमताओं की आवश्यकता होती है। इसके अभाव में छात्र नौकरी बाजार में पीछे रह जाते हैं। गहराई से जाँचे तो पता चलता है कि कॉमर्स पाठ्यक्रमों में इंटर्नशिप, प्रोजेक्ट कार्य, समस्या समाधान पर कार्य या वास्तविक केस स्टडी का अभाव है, जो रोजगार योग्यता बढ़ाने में सहायक होते हैं।
युवा पीढ़ी कॉमर्स जैसे विषय का चुनाव इसलिए करती है क्योंकि इसमें करियर के अनेक विकल्प होते हैं जैसे कि अकाउंटिंग, फाइनेंस, बैंकिंग, बीमा आदि, परंतु शिक्षा प्रणाली इस विविधता और व्यावहारिकता को पूर्ण रूप से प्रतिबिंबित नहीं करती। सरकार और शैक्षणिक बोर्डों को चाहिए कि वे पाठ्यक्रम में व्यावहारिक शिक्षा और कौशल विकास को प्राथमिकता दें। इससे न केवल छात्र रोजगार के लिए तैयार होंगे, बल्कि वे आर्थिक विकास में भी योगदान दे सकेंगे।
इस मुद्दे पर विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि शिक्षक प्रशिक्षण पर ध्यान देना जरूरी है। शिक्षकों को सिर्फ विषय सामग्री पढ़ाने की बजाए विद्यार्थियों को व्यावहारिक ज्ञान देने के लिए प्रशिक्षित किया जाना चाहिए। डिजिटल साधनों, इंटरेक्टिव लर्निंग और उद्योग के साथ साझेदारी बढ़ा कर भी इस समस्या को कम किया जा सकता है।
संक्षेप में, भारत में कॉमर्स शिक्षा की गुणवत्ता सुधारना अत्यंत आवश्यक है ताकि केवल डिग्रीधारी नहीं बल्कि कार्यक्षेत्र के लिए सक्षम पेशेवर तैयार हो सकें। तभी छात्रों की रोजगार योग्यता में सुधार होगा और देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। आने वाले वर्षों में इस दिशा में प्रभावी पहल की अपेक्षा की जा रही है।














