कन्नड़ सांस्कृतिक क्षेत्र के एक महत्वपूर्ण स्तम्भ, वयोवृद्ध पत्रकार और फिल्म निर्माता एन.एस. शंकर का निधन हो गया है। उन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी गहरी पकड़ के साथ-साथ फिल्म निर्देशन में भी अमिट छाप छोड़ी है। उनके निधन से कन्नड़ सिनेमा और पत्रकारिता जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।
एन.एस. शंकर ने पत्रकारिता में कई सालों तक काम किया और अपनी बेबाकी और सच्चाई के लिए जाने गए। उनकी लेखनी और रिपोर्टिंग ने कन्नड़ समाज के विभिन्न पहलुओं को उजागर किया और महत्वपूर्ण सामाजिक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया। वे मीडिया में अपने ईमानदार और निष्पक्ष दृष्टिकोण के लिए समादृत थे।
फिल्म निर्देशन में उनका सबसे उल्लेखनीय योगदान 1997 में आई फिल्म ‘उल्टा पल्टा’ है, जो एक सफल और क्रांतिकारी फिल्म मानी जाती है। इस कॉमेडी ड्रामा ने दर्शकों को खूब पसंद किया और इसे कन्नड़ सिनेमा में एक मील का पत्थर माना जाता है। फिल्म की सफलता ने उन्हें सिनेमा के क्षेत्र में भी एक मजबूत पहचान दिलाई।
एन.एस. शंकर ने अपने करियर के दौरान न केवल पत्रकारिता और फिल्म में बल्कि कन्नड़ संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने नई पीढ़ी के लिए एक प्रेरणा स्रोत बने और कई युवा पत्रकारों व फिल्मकारों को मार्गदर्शन दिया।
उनके निधन पर कन्नड़ सिनेमा और मीडिया के कई दिग्गजों ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि एन.एस. शंकर का योगदान सदैव याद रखा जाएगा। उनकी रचनात्मकता और कार्य के प्रति उनकी प्रतिबद्धता ने उन्हें हमेशा ही जनता के दिलों में खास जगह दी।
कन्नड़ सांस्कृतिक जगत ने अब एक अमूल्य रत्न खो दिया है। उनके परिवार, मित्रों और सहयोगियों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की जाती है। एन.एस. शंकर की यादें और उनके कार्य सदैव जीवित रहेंगे, जो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करते रहेंगे।














