नई दिल्ली: वर्ष 2022 से, केंद्रीय विश्वविद्यालयों ने अपने प्रवेश प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। अब वे छात्रों के चयन के लिए CBSE बोर्ड के परिणामों के बजाय CUET (केंद्रीय विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा) के स्कोर का उपयोग कर रहे हैं। यह परिवर्तन देश के उच्च शिक्षा तंत्र में एक नया अध्याय है जो न केवल प्रवेश प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाता है, बल्कि छात्रों के लिए समान अवसर भी सुनिश्चित करता है।
केंद्रीय विश्वविद्यालयों की ओर से यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे विभिन्न बोर्डों से आने वाले छात्रों के बीच चयन में एकसमान मापदंड स्थापित होता है। उपयोगकर्ता अनुभव और शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के उद्देश्य से CUET आधारित चयन प्रणाली छात्रों की योग्यता, क्षमताओं और ज्ञान का विस्तृत मूल्यांकन करती है।
CUET का यह नया स्वरूप विभिन्न विषयों को कवर करता है तथा छात्रों को अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार विषय चुनने का विकल्प प्रदान करता है। इसके साथ ही, यह भी देखा गया है कि CUET परीक्षा में बेहतर तैयारी करने वाले छात्र अपनी पसंदीदा विश्वविद्यालयों में दाखिला पाने में सफल हो रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि CUET आधारित प्रवेश प्रणाली से छात्रों को प्रतियोगिता की तैयारी के लिए एक समान मंच मिलता है। यह प्रणाली सर्वमान्य होती जा रही है, जिसमें छात्रों को केवल बोर्ड परीक्षा के परिणामों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। इसके चलते छात्रों को अपनी परीक्षा प्रदर्शन सुधारने और बेहतर कौशल विकसित करने का अवसर मिलता है।
शिक्षा मंत्रालय ने भी इस बदलाव को सकारात्मक कदम बताते हुए कहा है कि यह छात्रों के लिए अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष निर्णायक प्रक्रिया सुनिश्चित करता है। इसके परिणामस्वरूप, केंद्रीय विश्वविद्यालयों में दाखिला प्रक्रिया अधिक सुव्यवस्थित और डिजिटल पद्धति से संचालित होने लगी है।
अंत में कहा जा सकता है कि CUET आधारित प्रवेश प्रणाली शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता और समता दोनों को बढ़ावा देने का प्रयास है। इससे छात्रों को उनकी योग्यता और क्षमताओं के आधार पर उचित स्थान मिल सकेगा और देश के शैक्षिक वातावरण में सुधार होगा। छात्रों और अभिभावकों को चाहिए कि वे इस नई प्रणाली को समझें और इस दिशा में उचित तैयारी करें।















