नई दिल्ली। तीन छात्रों ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली के खिलाफ आवाज उठाई थी, जिसके बाद जो बौखलाहट और ट्रोलिंग उन्हें सहनी पड़ी, अब बोर्ड के स्वयं के सुधारों ने उनकी शिकायतों को सही साबित कर दिया है। वेदांत श्रीवास्तव, निसर्गा अधिकारी और सार्थक सिद्धांत तीन ऐसे विद्यार्थी हैं जिन्होंने सार्वजनिक मंचों पर CBSE की आलोचना की थी, जिसके कारण उन्हें लगातार ऑनलाइन और ऑफलाइन अस्त-व्यस्त टिप्पणियों का सामना करना पड़ा।
CBSE के ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम को लेकर इन छात्रों ने गंभीर पहल की थी। उन्होंने कहा था कि इस प्रणाली में कई तकनीकी खामियां और मानव त्रुटियों के कारण छात्रों के भविष्य के साथ अन्याय हो सकता है। हालांकि, उनकी बातों को शुरू में उपेक्षा और आलोचना का सामना करना पड़ा। लेकिन बोर्ड ने हाल ही में इस प्रणाली में कुछ गलतियों और त्रुटियों को मान्यता दी है और सुधारात्मक कदम उठाने का वादा किया है।
इस व्यवस्था के तहत परीक्षाओं के पेपर एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मूल्यांकन किए जाते हैं, जिससे गतिशीलता और पारदर्शिता में वृद्धि होनी चाहिए थी। लेकिन तकनीकी और मानवीय गलतियों की वजह से कई छात्रों के अंक सही प्रकार से दर्ज नहीं हो रहे थे, जो उनके भविष्य को प्रभावित कर सकते थे। इस बात को तीनों छात्रों ने बड़े साहस के साथ आवाज दिलाई और न्याय की मांग की।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस घटना ने छात्रों की भागीदारी और उनकी समस्याओं को उजागर करने पर एक नई मिसाल कायम की है। वेदांत, निसर्गा और सार्थक ने न केवल अपनी बात रखी बल्कि पूरी पीढ़ी की आवाज़ भी बनी। बोर्ड की ओर से यह स्वीकार्यता छात्रों और अभिभावकों के लिए राहत भरी खबर है, जो लंबे समय से मूल्यांकन की विश्वसनीयता को लेकर चिंतित थे।
CBSE ने कहा है कि वे इस ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम की समीक्षा कर रहे हैं और जल्द ही सुधार करेंगे ताकि भविष्य में ऐसी त्रुटियां न हों। यह कदम छात्रों के हित में एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। इस पूरी घटना से यह स्पष्ट हो गया है कि जब छात्र अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाते हैं, तो बदलाव संभव होता है।
इस मामले ने शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता को दोबारा ज़ोर दिया है। इस प्रकार के मुद्दों पर खुली बातचीत और सुधारों से ही शिक्षा प्रणाली और भी मजबूत बन सकती है। वेदांत, निसर्गा और सार्थक की पहल ने युवा शक्ति की ताकत का परिचय दिया है, जो किसी भी प्रणाली में कमी को उजागर कर सुधार की दिशा में कदम बढ़ाने में सक्षम है।














