नई दिल्ली: पिछले सप्ताह बेंगलुरु में एफ64 जावेलिन थ्रो श्रेणी में अपना खुद का वर्ल्ड रिकॉर्ड तोड़ने वाले नामी पैराथलिट सुमित अंतिल ने हाल ही में कोचों के रवैये को लेकर एक अहम टिप्पणी की है। उन्होंने खुलकर कहा कि एक तिहाई कोच अहंकारी, जिद्दी और अभद्र स्वभाव के होते हैं, जो खिलाड़ियों के मानसिक व शारीरिक विकास में बाधा डालते हैं।
सुमित अंतिल, जो अपनी शानदार उपलब्धियों के लिए देश-विदेश में पहचान रखते हैं, ने इस मुद्दे पर बात करते हुए अपने अनुभवों को साझा किया और खुद को इस तरह के व्यवहारों का शिकार बताया। उनका मानना है कि कोचों का सही मार्गदर्शन और सकारात्मक व्यवहार ही खिलाड़ियों की प्रतिभा को निखारने में सहायक होता है।
अंतिल ने बताया, “मैंने खुद देखा और महसूस किया है कि कुछ कोच खिलाड़ियों के साथ अभद्रता करते हैं, उनका आत्मसम्मान चोट पहुंचाते हैं और उनकी क्षमता को सीमित कर देते हैं। ऐसे लोगों से सामना करने पर खिलाड़ी मानसिक रूप से अस्थिर हो सकते हैं, जिससे उनकी खेल प्रदर्शन पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।”
बीते सप्ताह बेंगलुरु में आयोजित प्रतियोगिता में अंतिल ने एफ64 वर्ग में एक नया विश्व रिकॉर्ड स्थापित किया। इस सफलता के दौरान उन्होंने अपने कोच के महत्व को स्वीकार करते हुए कहा कि केवल अच्छे और समर्थ कोच ही खिलाड़ियों को सफल बना सकते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि कोचों और खिलाड़ियो के बीच बेहतर संवाद और सम्मानपूर्ण व्यवहार आवश्यक हैं ताकि खेल की दुनिया में सकारात्मक माहौल बन सके।
खेल विशेषज्ञ भी इस बात से सहमत हैं कि कोचिंग प्रक्रिया में केवल तकनीकी प्रशिक्षण ही नहीं, बल्कि खिलाड़ियों की मानसिक और भावनात्मक देखभाल भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। विशेषज्ञों के अनुसार, खेल में प्रदेश स्तर से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक के खिलाड़ियों के मनोबल को बनाए रखना जरूरी है जिससे वे अपने लक्ष्य प्राप्त कर सकें।
सुमित अंतिल की इस बयानबाजी ने खेल जगत के भीतर कोचिंग की गुणवत्ता और खिलाड़ियों के साथ व्यवहार पर बहस छेड़ दी है। कई खिलाड़ी और पूर्व कोच भी इस विषय में अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं और सुधार की मांग कर रहे हैं।
भारतीय खेल प्राधिकरण तथा अन्य संबंधित संस्थान इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए जल्द ही कोचिंग मानकों और आचरण के नियमों को सुदृढ़ करने पर विचार कर रहे हैं। उनका उद्देश्य है कि देश के युवा प्रतिभाओं को ऐसा माहौल मिले, जहां वे बिना किसी दबाव के अपने कौशल का पूर्ण प्रदर्शन कर सकें।
अंत में, सुमित अंतिल की यह बात स्पष्ट है कि खेल की सफलता के पीछे सही मानसिकता, सकारात्मक शिक्षा और सम्मानपूर्ण व्यवहार ही सबसे अहम स्तंभ हैं, जिन्हें सभी कोचों और खिलाड़ियों को समझना और अपनाना चाहिए।















