नई दिल्ली: केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कांग्रेस के नेता राहुल गांधी पर तंज कसा और कहा कि वह “हताश” हैं और तकनीकी प्रगति के विरोधी हैं। प्रधान ने यह टिप्पणी तब की जब राहुल गांधी ने हाल ही में कई मुद्दों पर सरकार और उसकी नीतियों की आलोचना की।
प्रधान ने कहा, “राहुल गांधी उन लोगों में से एक हैं जो तकनीकी विकास और आधुनिकरण के खिलाफ कठिनाई दिखाते हैं। यह दिखाता है कि वे इस युग की जरूरतों को समझने में असफल रहे हैं और अपने राजनीतिक फायदे के लिए तकनीक का विरोध करते हैं।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि देश को ऐसे नेताओं की जरूरत है जो भविष्य की दिशा में सोचें और सुधारों को अपनाने के लिए तत्पर हों।
इससे पहले, प्रधान ने CBSE OSM (ऑनलाइन प्रणाली मॉनिटरिंग) में पाई गई विसंगतियों की जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का आश्वासन भी दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है, और किसी भी अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
धर्मेंद्र प्रधान ने दोनों मामलों में स्पष्ट संदेश दिया कि सरकार तकनीकी प्रगति को बढ़ावा देने और प्रशासनिक पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके साथ ही उन्होंने विपक्षी दलों को सलाह दी कि वे विकास के मार्ग को रोकने के बजाय सहयोग की भावना से काम करें।
विश्लेषकों का मानना है कि प्रधान की यह टिप्पणी कांग्रेस की पहल और राहुल गांधी की आलोचनाओं का सीधे जवाब है, जो अक्सर सरकार की डिजिटल और तकनीकी परियोजनाओं पर सवाल उठाती रही हैं। प्रधान का रवैया सरकार की तकनीकी उपलब्धियों को लेकर आशावादी नजर आता है और वह इसे अपनी सकारात्मक सरकार की छवि का हिस्सा मानते हैं।
इस प्रकार, केंद्रीय मंत्री की इस टिप्पणी से राजनीतिक सियासत में एक बार फिर संवाद का तड़का लगा है, जहां विकास और तकनीकी प्रगति को लेकर अलग-अलग नजरिए सामने आ रहे हैं। जनता और विशेषज्ञ दोनों ही इस बहस पर नजर बनाए हुए हैं कि भारतीय राजनीति में तकनीक की भूमिका कैसे आकार लेगी।














