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‘पेड्डी’ छायाकार आर रत्नवेलु: राम चरण की फिल्म के कुछ हिस्से फिल्म नेगेटिव पर क्यों शूट किए गए

‘Peddi’ cinematographer R Rathnavelu: Why portions of Ram Charan’s movie were shot on film negative

चेन्नई से रिपोर्टिंग: मशहूर छायाकार आर रत्नवेलु ने हाल ही में चर्चा में आई फिल्म में अपने कैमरा तकनीक के चयन को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। राम चरण की नई फिल्म में फिल्म नेगेटिव का इस्तेमाल करने के पीछे की वजहें दर्शकों और फ़िल्मी जानकारों के लिए बेहद दिलचस्प हैं।

आर रत्नवेलु, जिन्होंने कई बड़ी फिल्मों में कैमरा संचालन किया है, ने बताया कि इस फिल्म के कुछ हिस्से डिजिटल की बजाय पारंपरिक फिल्म नेगेटिव पर शूट किए गए। उन्होंने कहा कि यह निर्णय केवल सौंदर्यशास्त्र (Aesthetics) और दृश्य गुणवत्ता के लिहाज से लिया गया था। फिल्म नेगेटिव, डिजिटल कैप्चर के मुकाबले रंगों की गहराई और बनावट को बेहतर दर्शाता है, जो कहानी के महत्वपूर्ण और भावनात्मक हिस्सों की संवेदनशीलता को उभारने में मदद करता है।

उन्होंने आगे बताया, “जब हमने राम चरण की इस फिल्म पर काम करना शुरू किया, तो हमने महसूस किया कि कुछ दृश्य ऐसे हैं जिनमें डिजिटल शूटिंग पूरी तरह से उस भावना को व्यक्त नहीं कर पाती जो फिल्म के निर्देशक बучи बाबू सना ने अपेक्षित की थी। इसलिए, हमने विकल्प के रूप में फिल्म नेगेटिव को अपनाया।”

इस पहलू को समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि डिजिटल कैमरे और फिल्म नेगेटिव के बीच काफी तकनीकी अंतर होता है। डिजिटल कैमरे में इमेज इलेक्ट्रॉनिक सेंसर्स द्वारा कैप्चर की जाती है, जबकि फिल्म नेगेटिव कैमरे में प्रकाश के संपर्क से कैमरा फिल्म पर छवि बनती है। रत्नवेलु ने कहा कि फिल्म नेगेटिव में रंगों की पैमाइश और प्रकाश का सही संतुलन कहीं अधिक प्राकृतिक और जीवंत दिखाई देता है।

फिल्म के निर्माता और निर्देशक ने इस निर्णय को पूरी तरह समर्थन दिया क्योंकि वे चाहते थे कि फिल्मों की कहानी न केवल संवादों और अभिनय से बल्कि विजुअल अनुभव से भी दर्शकों को गहराई से छू सके। रत्नवेलु ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा, “मेहनत और तकनीक दोनों का उचित मेल हो तो दर्शक भी इस अंतर को महसूस कर पाते हैं। यह तकनीक हमें फिल्म के उन हिस्सों को और अधिक प्रभावशाली बनाने में मदद करती है।”

राम चरण की इस फिल्म पर काम करते हुए, उन्होंने डिजिटल और फिल्म के मिश्रण का सावधानीपूर्वक इस्तेमाल किया ताकि कहानी के हर पहलू में पूर्णता बनी रहे। इस फैसले ने फिल्म के प्रति दर्शकों की उत्सुकता और उम्मीदों को भी बढ़ाया है, खासकर उन लोगों के लिए जो पारंपरिक फिल्म निर्माण और छायांकन की कला के प्रशंसक हैं।

संक्षिप्त में कहा जाए तो आर रत्नवेलु की यह कोशिश फिल्म कॅाम्पोजिशन में एक नई गुणवत्ता लेकर आई है, जो दर्शाती है कि आधुनिक तकनीक और पारंपरिक विधियों का सामंजस्य फिल्मों को और ज्यादा प्रभावशाली बना सकता है। राम चरण की इस फिल्म की सफलता में इस तकनीकी चयन की अहम भूमिका रहेगी, यह तय लग रहा है।

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